Thursday, 15 July 2010

radiyo japan

રમતા રમતા ભણીયે કાર્યક્રમ

રમતા રમતા ભણીયે કાર્યક્રમ ધોરણ 1-2-3 મા જુલાઇ -ઑગષ્ટ 2010 માં 40 દીવ્સ ચલાવવા નો ચ્હે . આ કાર્યક્રમ માં પ્રવૃતિ દ્વારા જ્ઞાન મુજબ બાળકોને શિક્ષણ આપવાનું અભિગમ ચે.

प्रज्ञा (प्रवृति के साथ ज्ञान ) प्राथमिक शिक्षा में एक अभिनव कार्यक्रम

प्रज्ञा (प्रवृति के साथ ज्ञान ) प्राथमिक शिक्षा में एक अभिनव कार्यक्रम है

इस कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा १-२ के विद्यार्थिओं को दो अलग - अलग क्लासरूम (गुजराती - पर्यावरण ) और (गणित - रएँबो) में एक साथ एक्टिविटी के विद्यार्थी की क्षमता मुताबिक बच्चे अपने आप पढ़ते हैं
लेदर्स के माध्यम सें कार्ड पसंद करके उस कार्ड के हिसाब सें एक्टिविटी के द्वारा शिक्षा प्राप्त करते हैं
कार्ड के सूचित चित्र के अनुसार छ प्रकारके ग्रुप हैं
बच्चे कार्ड के चित्र



को लेकर शिक्षक के पास जाता है
शिक्षक इस प्रमाण सें उसे एक्टिविटी करता है
जिस तरह बच्चे लेदर के एक एक कार्ड के मुताबिक एक्टिविटी कर लेता है तो लेदर के पास जा कर अगले कार्ड को पसंद करता है
इस तरह एक एक माइलस्टोन पार करके प्रगति करता रहता है
इस कार्यक्रम की सबसें बड़ी विशेषता यह है की बच्चों को स्कुल बेग का भर उठाने सें मुक्ति मिलती है

TEACHER'S TRAINING IN JULY 2010

TEACHER'S TRAINING IN JULY 2010
STD: 1-2-3-4 TEACHERS ON 2nd JULY 2010
STD: 5-6-7 TEACHERS ON 16th JULY 2010

प्रज्ञा (प्रवृति द्वारा ज्ञान ) ABL (एक्टिविटी बैज लर्निंग ) कार्यक्रम

मिर्ज़ापर सी. आर. सी. की ३ स्कूलों की प्रज्ञा (प्रवृति द्वारा ज्ञान ) ABL (एक्टिविटी बैज लर्निंग ) कार्यक्रम के लिए पसंद की गयी है





(१) मिर्जापर कन्या शाला


(२) सुखपर कन्या शाला -१


(३) सुखपर कन्या शाला -२






दिनांक ७-10 जुलाई २०१० को इस कार्यक्रम के अंतर्गत इन स्कूलों के कक्षा १-२ के शिक्षकों को मेहसाना जिल्ला के विजापुर तहेसिल की स्कूलों की एक्सपोज़र विजीट की गयी और आगलोड़ में प्रशिक्षण दिया गया




इस प्रशिक्षण में सी.आर.सी. को-ऑर्डिनेटर नानजी जनजानी के आलावा निम्नी दर्शित शिक्षकों ने भाग लिया




(१) श्री किर्तिभाई सोनी प्रमुख अध्यापक सुखपर कन्या शाला -२


(2) श्री जयेशभाई सोलंकी अध्यापक सुखपर कन्या शाला -२


(3) श्रीमती गीताबेन त्रावादी प्रमुख अध्यापक मिर्जापर कन्या शाला


(4) श्रीमती रीताबेन कनासागारा अध्यापक मिर्जापर कन्या शाला


(5) शिल्पाबेन जेठी अध्यापक मिर्जापर कन्या शाला


(६) श्री किशोरभाई डाभी प्रमुख अध्यापक सुखपर कन्या शाला -१


(7) श्रीमती चेतनाबेन ठक्कर अध्यापक सुखपर कन्या शाला -१


(8) श्रीमती प्रतिमाबेन सोनी अध्यापक सुखपर कन्या शाला -१


(9) श्रीमती अन्जुमबेंन खत्री अध्यापक सुखपर कन्या शाला -१


Friday, 4 June 2010

सांगहाई विश्व मेलेका आयोजन

चाइना रेडियो इंटरनेशनल ने दुनिया के सामने चीन की च्छाबी को बहुत ही अच्छी तरहा सेन प्रस्तुत किया है

बेइजिंग ओलंपिक के बाद 2010 सांगहाई विश्व मेले को सी.आर.आई. ने हर एक देश के पंडाल(मंडप) को बहुत ही न्यायपूर्ण तरीके से बताया है
हर रोज के समाचारों में सांगहाई विश्व मेले को विस्तृत रूप से बताया जाता है
इस सें चीन की ताकत का अंदाज़ा निकलता है
वास्त्व में चीन सदा ही शांति पूर्ण देश है
पहले और दुसरे विश्व युध्ध में चीन ने किसी पर अपना प्रादबाव बनाया एसा बहुत ही कम जानने को मिलता है
इस लिए आज के चीन की विकास की गति तेज और सोहरद्रूप है
पूरे विश्वने चीन को जाना है, माना है और पहचाना है
सांगहाई विश्व मेलेका आयोजन करके चीनने पूरे एसिया को गौरव प्रदान किया है

Sunday, 30 May 2010

Radio Listening Activity Exhibition by Nanji Janjani

Global Kutch hobby Corner and Kutch Philatelic Association organised Exihibition on 7-8-9 May 2010 KACEA EXPO 10 at Jubilee Groung  in Bhuj. Mr. Nanji Janjani  participate in this exihibition and present Radio Listening Activity document, Competition letter and guidebook.

Exihibition of radio listening activity

Global Kutch hobby Corner and Kutch Philatelic Association organised 3 Day Exihibition on 23-24-25 April 2010 at Madanshinhji Library in Bhuj. Mr. Nanji Janjani has participate in this exihibition and present Radio Listening Activity document, Competion and guidebook.

Thursday, 13 May 2010

रूस में 7 मई को रेडियो दिवस मनाया जाता है।

जैसाकि हम जानते हैं - रेडियो का आविष्कार 19वीं शताब्दी के अन्त में हुआ था। 7 मई 1895 को प्रतिभाशाली रूसी वैज्ञानिक अलेक्सांदर पपोव ने पिटर्सबर्ग में रूसी भौतिकी-गणित समाज की बैठक में पहली बार अपने इस अनूठे आविष्कार को यानी दुनिया के पहले रेडियो को प्रस्तुत किया था। वे बेहद खुश थे कि वे 600 मीटर की दूरी पर अपनी आवाज़ का प्रसारण कर सकते हैं। 7 मई का वह दिन फिर इतिहास का एक पन्ना हो गया। बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में रेडियो को एक अजूबा ही माना जाता था। फिर 1924 में रूस में नियमित रूप से रेडियो प्रसारण शुरू हो गया। फिर द्वितीय विश्व युद्द में हुई रूस की विजय के वर्ष में एक नया दिवस - रेडियो दिवस मनाया जाने लगा। तब से लेकर आज तक कई बार ऐसे मौके भी आए हैं, जब रेडियो का तिरस्कार किया गया। जब टेलीविजन प्रसारण शुरू हुआ तो लोगों ने समझा कि अब रेडियो प्रसारण बन्द हो जाएँगे। फिर जब इन्टरनेट सामने आया तो फिर से यह भविष्यवाणी की गई कि अब रेडियो प्रसारणों के दिन लद चुके हैं। लेकिन रेडियो ने दुनिया में अपनी जगह बनाए रखी और आज भी वह एक सबसे लोकतांत्रिक और सबसे प्रभावशाली तथा कारगर समाचार साधन है। वास्तव में आज रेडियो के बिना जीवन की कल्पना करना भी कठिन है। भला कौन आज ख़बरें या संगीत सुने बिना रह सकता है। तमाम तरह की छोटी बड़ी जानकारियाँ हमें तुरन्त रेडियो से मिल जाती हैं। आज रूस में करीब दो हज़ार छोटे-बड़े रेडियो प्रसारण किए जाते हैं। सिर्फ़ मास्को में ही पचास से ज़्यादा रेडियो स्टेशन काम कर रहे हैं। रेडियो रूस के अध्यक्ष आन्द्रेय बिस्त्रीत्स्की ने बताया कि विदेशी भाषाओं में विदेशी श्रोताओं के लिए रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में बड़ी कड़ी प्रतियोगिता होने के बावजूद रेडियो रूस ने श्रोताओं के बीच अपनी भरी-पूरी जगह बना रखी है और रेडियो रूस के श्रोताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

Tuesday, 4 May 2010

रेडियो तेहरान

प्रातःकालीन UTC समयानुसार शोर्ट वेव

०२:30 - 3:00 M KHZ
२२ १३७५०
२५ ११७१०
सायंकालीन UTC समयानुसार शोर्ट वेव
१४:30 - 15:30 M KHZ
२५ ११९५५
२२ १३७००

रेडियो तेहरान की हिन्दी सेवा

रेडियो तेहरान की हिन्दी सेवा 25 अप्रैल 1998 को आरंभ हुई।


रेडियो तेहरान प्रतिदिन प्रात: कालीन व सांयकालीन कार्यक्रम प्रसारित करता है।प्रात: कालीन सभा आधे घंटे की भारतिय समयानुसार आठ बजे से साढ़े आठ बजे तक और सांयकालीन सभा एक घंटे की भारतीय समयानुसार आठ बजे से नौ बजे तक प्रसारित की जाती है।प्रात: कालीन सभा में साप्ताहिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त कुरआन मजीद की तिलावत समाचार और आज का इतिहास प्रसारित किया जाता है। सांयकालीन सभा में साप्ताहिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त कुरआन मजीद की तिलावत समाचार राजनीतिक चर्चा और हमारे अख़बार कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।

रेडियो रूस के श्रोता क्लबों का चौथा अखिल भारतीय सम्मेलन

रेडियो रूस के श्रोता क्लबों का चौथा अखिल भारतीय सम्मेलन पिछले साल दिल्ली स्थित रूसी विज्ञान और संस्कृति केंद्र में 15 से 16 दिसंबर तक आयोजित किया गया। इस सम्मेलन के दौरान सन् 2008 में भारत में रूस को समर्पित वर्ष और सन् 2009 में रूस में भारत को समर्पित वर्ष के परिणामों की चर्चा की गई तथा रूस और भारत के बीच सहयोग को समर्पित रेडियो रूस की प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम घोषित किए गए। इस के अलावा रेडियो रूस द्वारा आयोजित काव्य और हास्य प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा सबसे सक्रिय श्रोताओं और संवाददाताओं के नाम भी घोषित किए गए। अब हम आपके सामने विजेताओं के नाम प्रस्तुत करते हैं।

वर्ष 2009 के पुरस्कार विजेताः

रूस और भारत के बीच सहयोग को समर्पित रेडियो रूस की प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताः
1) नानजी जे. जाजाणी (अरिहंत नगर, गुजरात)
2) दलीप सिंह रोकाय (नैनीताल, उत्तराशण्ड)
3) अनिल ताम्रकार (कटनी, मध्य प्रदेश)

प्रोत्साहन पुरस्कार विजेताः
1) मितुल कंसल (कुरुक्षेत्र, हरियाना)
2) पराग पुरोहित (पुणे, महाराष्ट्र)
3) रिजवान सज्जाद (फफून्द, औरैया, उत्तर प्रदेश)

विशेष पुरस्कार विजेताः
चुन्नीलाल कैवर्त (सोनपुरी, छत्तीसगढ़)

रेडियो रूस को पत्र भेजने में मदद करने के लिए पुरस्कार विजेताः
शमसुद्दीन साकी अदीबी (मुबारकपुर आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश)

काव्य प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताः
1) आर. एन. सिंह (शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश)
2) क़मर सुल्ताना कुरैशी (नया भोजपुर, बिहार)
3) भैयालाल प्रजापति (मरुफ़पुर, उत्तर प्रदेश)

हास्य प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताः
1) निलेश कुमार सिंह (खनिता, बक्सर, बिहार)
2) श्रीमति नुनुदेवी (बरमा, शेखपुरा, बिहार)

पृथ्वी से परे सभ्यता की खोज dw

इस ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं हैं तो वे सभ्यताएं कहां हैं, जो हमारी जैसी या शायद उससे भी बेहतर हैं? उड़न तश्तरियां कहां से आती हैं? वे कल्पनाएं नहीं हैं तो उन्हें चलाने वाले हमारे रेडियो संकेतों का जवाब क्यों नहीं देते.




अमेरिका के प्रोफ़ेसर फ़्रैंक ड्रेक को भी यही प्रश्न कुरेदा करते थे. आज से पचास साल पहले, 1960 में, जब वे तीस साल के भी नहीं थे, तब उन्होंने एक रेडियो टेलिस्कोप की मदद से पहली बार पृथ्वी से परे इतरलोकीय सभ्यता की आहट लेनी चाही. सोचा, उन्हें कुछ इस तरह की आवाज़ें सुनाई पड़ेंगी. वह बताते हैं, "मेरे पहले प्रयोग का नाम था प्रॉजेकट आज़मा. हमने दो महीनों तक सूर्य जैसे दो तारों की दिशा में रेडियो संकेतों की खोज की. लेकिन हमें कुछ नहीं मिला."



कोई सुराग नहीं



फ्रैंक ड्रेक को आज तक ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिसके बारे में भरोसे के साथ कहा जा सकता कि वह किसी Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: दूसरी दुनिया के सभ्य लोगों की पैदा की हुई रेडियो तरंग है. रेडियो तरंगें तो ढेरों मिलती हैं, लेकिन वे आकाशीय पिंडों द्वारा स्वयं पैदा की हुई प्राकृतिक तरंगें होती हैं. तब भी, फ्रैंक ड्रेक की जिज्ञासा और लगन की कोख से विज्ञान की एक नई शाखा का जन्म हुआ, जैवखगोल विज्ञान (बायोएस्ट्रॉनॉमी) का. विज्ञान की यह नई शाखा अंतरिक्ष में संभावित जीवन की खोजबीन को समर्पित है.



फ्रैंक ड्रेक सन फ्रांसिस्को के तथाकथित सेती इस्टीट्यूट के लिए काम करते हैं. SETI का अर्थ है Search for Extraterrestrial Intelligence, यानी, पृथ्वी से परे बुद्धिधारियों की खोज. आज से पैंतालीस साल पहले 8 अप्रैल 1965 के दिन सेती ने तश्तरीनुमा बड़े बड़े रेडियो एंटेनों की सहायता से अंतरिक्ष में बुद्धिधारी प्रणियों की खोज शुरू की.



भ्रम टूटा



दो ही साल बाद, 1967 में वैज्ञानिकों को लगा कि बटेर हाथ लग गयी. तब अख़बारों की सुर्खियां कुछ इस तरह की थीं. "डॉक्टरेट कर रही महिला वैज्ञानिक ने हरे आदमियों का पता लगा लिया." "हम अंतरिक्ष में अकेले नहीं हैं." "खगोलविदों ने नई दुनिया खोज निकाली."



उस महिला वैज्ञानिक का नाम था जोसेलिन बेल. लेकिन, सारी ख़ुशी पर तब पानी फिर गया, जब पता चला कि जिस रेडियो पल्स (स्पंद) को किसी सभ्यता का संकेत समझा जा रहा था, वह वास्तव में एक मृत न्यूट्रॉन तारे से आ रहा था. न्यूट्रॉन तारे ऐसे ठोस पिंड होते हैं, जो बहुत तेज़ी से घूमते हैं और साथ ही बहुत ही कसी हुई रेडियो तरंगों की कौंध सी पैदा करते हैं. इसीलिए उन्हें पल्सर भी कहा जाता है.

मई की पहेली Deutsche Welle

आइसलैंड में ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद कई दिनों तक उड़ानें ठप रही. हवा में चक्का जाम होने के कई दिनों बाद सबसे पहले फ़्रैंकफ़र्ट एयरपोर्ट से भरी गई उड़ानें. आपको बताना है कि किस देश में है फ़्रैंकफ़र्ट एयरपोर्ट.
ए. फ़्रांस
बी. जर्मनी
सी. डेनमार्क
आप अपने जवाब 31 मई तक डाक, ईमेल या एसएमएस से भेज दें. विजेताओं के नाम उचित समय पर "आपकी बारी आपकी बात" कार्यक्रम में बताए जाएंगे और वेबसाइट पर भी जारी होंगे. सभी विजेताओं को पत्र से सूचना भी भेजी जाएगी. आप अपना नाम और पता साफ़ साफ़ अक्षरों में लिखें.
हमारा पता जर्मनी में-
Deutsche Welle
Hindi Service
53110 Bonn /
GERMANY
Tel.No. 0049 228 429-4760
Fax No.0049 228 429-4720
भारत में-
Deutsche Welle
Hindi Service
Post Box No. 5211
Chanakyapuri,
New Delhi – 110021 / INDIA
ई-मेल का पताः hindi@dw-world.de
एसएमएस का नंबरः +91 9967354007
वॉयसमेल का नंबरः 0049 228 429 16 4176

रेडियो जापान ने जापानी भाषा

रेडियो जापान ने जापानी भाषा सिखाने के लिए“सवालों में सतरंगी जापानी”कार्यक्रम की नई वैबसाइट शुरू की है।


आप हमारे प्रश्नों के उत्तर देकर बोलचाल की जापानी के कुछ ज़रूरी बोलों का अभ्यास कर सकते हैं। अगर आपका उत्तर सही होगा तो स्क्रीन पर कुछ उभरेगा। अब देर कैसी? आप भी अपना जापानी भाषा ज्ञान परखें!

कंप्यूटर प्रिंटर से स्वास्थ्य ख़तरे में

फ़ोटोकॉपी मशीनयदी आप के पास कंप्यूटर है, तो उस के साथ जुड़ा एक प्रिंटर भी ज़रूर होगा. प्रिंटर यदि एक लेज़र प्रिंटर है, जिस में स्याही की जगह महीन पाउडर वाला एक कार्ट्रिज लगता है, तो सावधान हो जाइये! आपका स्वास्थ्य ख़तरे में है.
कंप्यूटर प्रिंटर के कार्ट्रिज वाले पाउडर को टोनर कहते हैं. टोनर के कण इतने महीन होते हैं कि कार्ट्रिज से बाहर वे बड़ी देर तक हवा में तैर सकते हैं और सांस के रास्ते से हमारे फेफड़ों में पहुंच कर हमें बीमार कर सकते हैं.
जर्मनी में फ्राइबुर्ग विश्वविद्यालय के पर्यावरण चिकित्सा और अस्पताल स्वच्छता संस्थान की एक शोध टीम ने इसी को अपनी खोज का विषय बनाया. वह जानना चाहती थी कि टोनर से उड़ने वाले अत्यंत महीन कण जब हमारे फेफड़ों में पहुंचते हैं, तो उनका क्या असर होता है? उन्होंने टोनर की धूल का फेफड़े की कोषिकाओं के कल्चर यानी संवर्ध से संपर्क कराया. परिणाम उनके लिए बहुत ही आश्चर्यजनक रहा, जैसा कि संस्थान के निदेशक प्रो. फ़ोल्करमेर्स सुंदरमान का कहना है, "फेफड़े की इन कोषिकाओं को टोनर की धूल के संपर्क में लाने पर उनके जीनों को बड़ा नुकसान पहुंचा. यह नुकसान इतना व्यापक और गहरा पाया गया कि हमें कहना पड़ेगा कि उससे कोषिकाओं के जीनों में म्यूटेशन पैदा होता है."

Sunday, 4 April 2010

२२ अप्रैल पृथ्वी दिन

२२ अप्रैल को पुरे विश्व में  पृथ्वी दिन मनाया जाएगा | हमें अपनी पृथ्वी को बचाने के लिए अपने बल पर कुछ वास्तविक काम करना होगा | आओ हम सब अपने स्थान पर पृथ्वी को बचाने के लिए पेड़ पौधे लगाएं , प्रदुषण को फैलाते कारखानों - वाहनों सें बचाएं | स्कूलों में बच्चों को जागृत करें |

કેસુડો

કચ્છ ના મધ્ય પર્વતીય વિસ્તારો માં ફાગણ મહિના માં કેસુડા નાં ફુલ ખીલેલા જોવા મળે ચે. ઍનો રંગ ઍટલો બધો પ્રભાવી લાગે કે વગડા માં જાણે આગ લાગી હાય.

रेडियो जापान की ७५ वीं जयंती पर प्रतियोगिता

रेडियो जापान की ७५ वीं जयंती पर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया है | जिसमें एक प्रश्न का उत्तर भेजना है | पुरे विश्व में सें ज्यादा योग्य जवाब भेजने वाले तीन भाग्यशाली को इस वर्ष जापान जाने का अवसर मिलेगा |
प्रश्न : रेडियो जापान का आपके लिए क्या महत्व है ?
इस विषय पर फोटो , रेखाचित्र पर अपने विचार भेजने हैं |
अन्तिम तारीख : १० मई २०१०
http://www.nhk.or.jp/nhkworld/hindib

रेडियो जापान अब नई फ्रिक्वंसी ४९ मी. पर

रेडियो जापान का हिंदी प्रसारण  अब २८ मार्च सें
नई फ्रीक्वेंसी 49 मीटर बैंड में 5975 किलोहर्टज़ पर हो रहा है |


Saturday, 27 March 2010

સી.આર.સી. કક્ષાની શિક્ષકોની તાલીમ

સી.આર.સી. કક્ષાની શિક્ષકોની તાલીમ તા.15 અપ્રિલ 2010 થી તા.28 અપ્રિલ 2010 સુધી યોજાશે.

Tuesday, 16 March 2010

VOR Competition 2010

Voice of Russia Organized new competition of 2010.
visit : www.hindi.ruvr.ru

Monday, 15 March 2010

ડૉ. જયન્ત ખત્રી ગૌરવ પુરસ્કાર ફોર્મ ડાઊન લોડ

ગુણોત્સવ ઉપચારત્મક વર્ગો નુ ઈન્ટરનલ ટેસ્ટીંગ

ગુણોત્સવ ઉપચારત્મક વર્ગો નુ ઈન્ટરનલ ટેસ્ટીંગ : ગોરેવલી, હોદકો, કોટડા (દીનારા) , હરુન્વાન્ઢ , સોયલા, સરગુ-2, ફોતડી, વાન્ઢાય , ભીરંડીયારા, રેઢાર્વાન્ઢ, મમુઆરા, દગાડા ગામો ની મુલાકાત.

Saturday, 6 February 2010

SIT Bhuj Start on 4th Feb.2010

Satellite Interective Terminal (SIT) Bhuj has been start on 4th Feb.2010 at District Institute of Education and Training (DIET) Bhuj-Kutch. SIT is the centre of Vigyan Prasar Science Programme Terminal. Vigyan Prasar has established an EduSAT two way Audio-Video Interactive Communication network in association with Devlopment and  Educational Communication Unit (DECU) of Indian Space Research Organization  (ISRO) Ahmedabad.
Mr. Nanji J. Janjani is Site Co-Ordinator of SIT Bhuj.
Mr. Bhupesh J. Goswami is Co-Ordinator of SIT Bhuj

Sunday, 31 January 2010

NANJI JANJANI APPOINTED FOR SIT CO-ORDINATOR

VIGYAN PRASAR INDIA ORGANIZED EDUSAT ORIENTATION PROGRAM WORKSHOP ON 21st AND 22nd JANUARY AT COUNCIL OF SCIENCE AND TECHNOLOGY LUCKNUW U.P. IN THIS WORKSHOP 25 SIT MEMBERS PARTICIPATE FROM ALL INDIA. FROM GUJARAT SIT BHUJ MR. BHUPESH GOSWAMI AND MR. NANJI JANJANI PARTICIPATES IN THIS WORKSHOP. MR. NANJI JANJANI SELECT CO-ORDINATOR FOR SIT BHUJ.






Saturday, 30 January 2010

EduSAT Orientation Workshop

२१-२२  जनवरी २०१० को विज्ञानं प्रसार नई दिल्ही की ओर सें COUNCIL OF SCIENCE & TECHNOLOGY UP लखनौ में कार्यशाला में EduSAT orentation workshop में भाग लेने का अवसर मिला | मेरे साथ मेरे साथी सीओ-ordinator मर. भूपेश गोस्वामी उपस्थित रहे | दो दिनों में हमें विज्ञानं प्रसार की ओर सें प्रसारित शिक्षा के कार्यक्रमों को SIT पर विद्यार्थिओं को कैसे बताएं और उसका रिपोर्टिंग के बारे में मार्गदर्शन दिया गया |
विज्ञानं प्रसार के वैज्ञानिक डॉ. टी. वि. वैन्क्तेश्वरण और इरफाना बेगम
साथ में हमें लखनौ के सुप्रशिध बड़ा इमामबाडा बताया गया |

Friday, 1 January 2010

VOR Radio Program

www.hindi.ruvr.com<

NANJI JANJANI VOR RADIO PROGRAM

NANJI JANJANI WON THE FIRST PRIZE IN THE VOICE OF RUSSIA COMPETITION

log onhttp://www.hindi.ruvr.ru/

Thursday, 31 December 2009

VOR Listener's Conference PHOTO

VOR Listener's Conference फोटो

वोईस ऑफ़ रसिया की हिंदी सेवा की ओर सें वर्ष २००९ को रूस में भारत वर्ष मनाया गया
इस प्रसंग पर वोईस ऑफ़ रसिया ने २००९ की अपने श्रोताओं के लिए रसिया की जानकारी पर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया
पुरे भारत सें हजारो श्रोताओं ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया
१५-१६ दिस. के दीन नै दिल्ही में रुसी विज्ञानं एवं सांस्कृतिक केंद्र पर रेडियो रूस की ओर सें ४ था अखिल भारतीय श्रोता सम्मलेन आयोजित किया गया

इस अवसर पर रूस के राजदूत मी. एलेक्झंदर कदाकिन मुख्य मेहमान थे
रेडियो रूस के दक्षिण एशिया की संवाददाता इरिना मेक्सिमेंको की ओर सें प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिया गया
कच्छ -भुज के नानजी जनजानी को प्रथम पुरस्कार मिला

नानजी जनजानी ने अपनी ओर सें आभार प्रकट करते हुए रूस और भारत की मैत्री के बारे में और रूस के अध्यापक वसीली एलेक्झंदर सुखोम्लिंसकी के जीवन के बारे में बताया









इस सम्मलेन में १२५ सें अधिक श्रोताओं ने भाग लिया दो दीन में सब श्रोता मिलकर रेडियो डी-Xing पर चर्चा की