Thursday, 14 July 2011

शनि में भयंकर अंतरिक्ष तूफान

शनि में भयंकर अंतरिक्ष तूफान

 

शनि ग्रह इस वक्त भंयकर तूफानों में घिरा हुआ हैं. तूफान बीते साल दिसंबर से जारी हैं. अंतरिक्ष तूफानों से अब तक इतनी ऊर्जा निकल चुकी है कि इससे इंसान की अगले 2,000 साल की ऊर्जा की मांग पूरी हो जाती.

 
ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंस के मुताबिक अंतरिक्ष के इन तूफानों में शनि का ज्यादातर हिस्सा घिरा हुआ है. आठ धरतियों को मिलाने से जितना बड़ा इलाका बनेगा, शनि का उतना ही बड़ा हिस्सा तूफान की चपेट में है. विज्ञान जगत की ब्रिटिश पत्रिका नेचर में छपे ताजा लेख के मुताबिक तूफान करीब पूरे शनि ग्रह पर पसरा हुआ है.
मुख्य रिसर्चर जॉर्ज फिशर कहते हैं, "और अब, खोज के सात महीने बाद पता चला है कि तूफान की चपेट में 4 अरब वर्गमीटर का इलाका है. यह धरती के धरातल का आठ गुना है." फिशर के मुताबिक तूफान शनि में होने वाले मौसमी बदलाव का हिस्सा हैं. धरती से कम से कम 1.2 अरब किलोमीटर दूरी पर परिक्रमा कर रहे शनि में मौसम बदल रहा है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक जिन जगहों पर अत्यधिक उग्र तूफान है, वहां प्रति सेकेंड 10 से ज्यादा बार बिजली चमक रही है. अध्ययन के लिए वैज्ञानिक उपग्रह कैसिनी का सहारा ले रहे हैं. कैसिनी योजना खास तौर पर शनि के अध्ययन पर केंद्रित है. अमेरिकी एजेंसी नासा ने भी शनि पर उग्र अंतरिक्ष तूफान होने की पुष्टि की है.
रिसर्च के सह लेखक और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के एंड्रू इंगेरसोल कहते हैं, "शनि पर कई सालों को झुनझुनाहट के साथ शांत मौसम दिखाई पड़ता है. फिर यही अचनाक उग्र ढंग से फूट पड़ता है."
अभी यह साफ नहीं है कि तूफान और बिजली कड़कने के साथ बारिश हो रही है या नहीं. अगर बारिश के संकेत मिले तो शनि में जीवन की उम्मीदें जगेंगी.

VIGYAN PRASAR EduSAT Network Proposed schedule for the month of July 2011

VIGYAN PRASAR EduSAT Network Proposed schedule for the month of July 2011
1.
Technical checking   English/ Hindi  Ms. Rita  Technical person of SIT All SIT
2. Monday  4.7.11 
Video Show Kahani Dharti ki Ep. 1-3 Tamil   For common people  All SIT’s
3. Tuesday 5.7.11 
 Training on Physics Kit   Hindi  Mr. Kapil Tripathi School level Physics Teachers
4. Wednesday 6.7.11 
Cancer Cervix  English/ Hindi  Dr. Natasha Dr. Tabassum Degree level Students, Teachers and Science
Communicators All SIT’s
5. Thursday 7.7.11 
Distance Education Programme (Science writing & Translation) Urdu   Dr. Subodh Mahanti   Dr. Obaidur
Rehman Mr. Mohammad Khaleel  Journalism & language students   Jammu & Kashmir and Lucknow
6. Friday 8.7.11 
Popular Science Lecture chemistry in kitchen  Hindi  Dr. Narender Singh  Students of class VIII to X All IT’s
7. Monday  11.7.11 
Video Show Kahani Dharti ki Ep. 1-3 Malayalam  For common people All SIT’s
8. Wednesday 13.7.11 
Training programme on Disaster management  Earthquake  English  Resource person
from national disaster management Students of Sd. XII and degree level & Science communicator,  All SIT’s
9. Monday  18.7.11
 Video Show Kahani Dharti ki Ep. 1-3 Bangla  For common people All SIT’s
10. Wednesday 20.7.11
 Demonstration on Optic kit  English  Mr. Rintu Nath  Physics Teachers School  level All SIT’s
11. Friday 22.7.11
 Popular Science Lecture Importance of life Science English/ Hindi  Dr. Monika Kaul  Students of class IX to XII All SIT’s
12. Monday  25.7.11
Video Show Kahani Dharti ki Ep. 4-6  Hindi  For common people All SIT’s
13. Thursday 28.7.11
 Nature conservation   Hindi  Mr. Devendra Mewari Students, Teachers and Sci. Activist All SIT’s
14. Friday 29.7.11
 Popular Science Lecture  Conjunctivitis  English/ Hindi  Students, Teachers and Sci. Activist

भावुकता से भरी अटलांटिस ने आखिरी उड़ान |

अमेरिकी अतंरिक्ष यान अटलांटिस आखिरी मिशन पर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ. अपनी 33वीं उड़ान के बाद अंटलांटिस रिटायर हो जाएगा. वैज्ञानिक चमत्कारों की गवाही देने वाला 30 साल पुराना यह यान आगे म्यूजियम का हिस्सा बन जाएगा

तेज चमक और धुएं के गुबार के बीच शुक्रवार को 3.5 टन भारी अटलांटिस ने फ्लोरिडा के जेएफके स्पेस सेंटर से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी. यान 12 दिन के मिशन पर निकला है. 1981 से उड़ान भरने वाला अटलांटिस अब तक 355 अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष तक ले जा और वहां से ला चुका है. उड़ान की दूरी को देखा जाए तो अटलांटिस अब तक 87 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर चुका है.
शुक्रवार को अटलांटिस की उड़ान तय नहीं थी. खराब मौसम की वजह से लगा कि उड़ान टालनी पड़ेगी. लेकिन दोपहर के वक्त नासा के फाइरिंग रूम से गो की आवाज आई. उड़ान भरने के लिए उल्टी गिनती शुरू हुई. लेकिन जब गिनती 31 सेंकेंड पर रुकी तो लगा कि अभियान टल गया है. यान पर लादे गए सामान के भार की जांच की गई. हरी झंडी मिलने पर उल्टी गिनती फिर शुरू हुई और स्थानीय समायानुसार 11 बजकर 29 मिनट पर अटलांटिस अंतरिक्ष के लिए निकल पड़ा.अटलांटिस का क्रूअटलांटिस का क्रू
यान के आखिरी अभियान में शामिल सभी अंतरिक्ष यात्री अमेरिकी हैं. क्रू में क्रिस फर्गुसन, डग हर्ले, सैंडी मैगनस और रेक्स वैलहाइम शामिल हैं. लॉन्च डायरेक्टर ने क्रू सदस्यों को अमेरिका की पहचान बताया. यान रविवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ेगा. क्रू और यान सात दिन तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा रहेगा.
इस मिशन में अटलांटिक स्पेस स्टेशन में काम कर रहे वैज्ञानिकों के लिए खाना गया है. साथ में एक ऐसा रोबोट भी है जो अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे सैटेलाइट्स में दोबारा ईंधन भरने के प्रयोग का हिस्सा है.
अटलांटिस से पहले नासा के डिस्कवरी और एंडेवर यान रिटायर हो चुके हैं. अटलांटिस के रिटायर होने के बाद नासा रूसी रॉकेटों के जरिए अंतरिक्ष अभियान में हिस्सा लेगा. आशंका है कि अटलांटिस के रिटायर होते ही कैनेडी स्पेस सेंटर का काफी काम कम हो जाएगा, जिसके चलते कई लोगों की नौकरी चली जाएगी. ऐसी भावुक बातों के साथ अटलांटिस के आखिरी अभियान के प्रति खासा अनुराग पनप चुका है.

भारत को रूस की नागरिक वैमानिक परियोजनाओं में शामिल होने का निमंत्रण

रूस के उपप्रधानमंत्री सेर्गेय इवानोव ने भारत से कहा है कि वह रूस की नागरिक वैमानिक परियोजनाओं में शामिल हो।
सेंट पीटर्सबर्ग में चल रहे "पीटर्सबर्ग आर्थिक फ़ोरम" के अन्तर्गत आयोजित "रूसी-भारतीय बातचीत"  कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा- हम पिछले अनेक वर्षों से लड़ाकू विमानों के निर्माण के क्षेत्र में आपसी सहयोग कर रहे हैं। अब इस सहयोग को नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में विकसित करने का समय आ गया है।
उनके अनुसार रूस सुख़ोई सुपरजेट, ए०एन०-148 और तू-204 एस०एम० जैसे विमानों के निर्माण में भारत के साथ सहयोग कर सकता है।
इसके अलावा मास्को मध्यम दूरी के विमानों के निर्माण में भी नई दिल्ली के साथ सहयोग करने को तैयार है। रूस चाहता है कि भारतीय कम्पनी एच०ए०एल० एयरोनॉटिक्स मध्यम दूरी के एम०एस०-21 नामक नागरिक विमानों के निर्माण में रूस के साथ सहयोग करे।  

यूराल में प्रदर्शनी “इन्नोप्रोम-2011” का उद्घाटन हुआ

अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी “इन्नोप्रोम-2011” का आयोजन दूसरी बार इकातेरीनबुर्ग (यूराल) में हो रहा है। प्रदर्शनी के आगुंतकों को ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, औषधि विज्ञान, परिवहन व उद्योग और विज्ञान की दूसरी शाखाओं के क्षेत्र में नई परियोजनाएं देखने को मिलेंगी। रूस और अन्य देशों की बड़ी कंपनियाँ यहाँ अपनी नई खोजों का प्रदर्शन करेंगी। इसके अतिरिक्त इस प्रदर्शनी में “इन्नोप्रोम कार्यशाला” भी होगी, जिसमें स्कूली छात्र, विश्वविद्यालय के छात्र व रिसर्च विद्यार्थी अपने कार्यों का प्रदर्शन कर सकेंगे। कंपनियों को “इन्नोप्रोम” में कुल 1.7 अरब डॉलर मूल्य के लगभग 40 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।

अन्तरिक्ष में भी कूड़े की सफ़ाई ज़रूरी है |

रूस का अन्तरिक्ष कारपोरेशन “एनेर्गिया” एक ऐसा अन्तरिक्ष यान बना रहा है, जिसमें बैठकर अन्तरिक्ष यात्री अन्तरिक्ष में तैनात उपग्रहों की मरम्मत करने के लिए जाया करेंगे। यही नहीं, इस यान की सहायता से पृथ्वी की परिधि पर उपस्थित अनुपयोगी उपग्रहों और नष्ट हो गए यानों या उपग्रहों के टुकड़ों यानी अंतरिक्षीय कूड़े को इकट्ठा करना संभव होगा। सन् 2015 में रूस के वस्तोचनी अंतरिक्ष अड्डे से यह अन्तरिक्ष यान पहले बिना यात्रियों के ही अन्तरिक्ष में रवाना किया जाएगा और तीन वर्ष बाद अंतरिक्ष यात्री भी इस तरह के अन्तरिक्ष यान में सवार हो सकेंगे।
इस अंतरिक्ष यान में आम तौर पर दो अंतरिक्ष यात्री रहेंगे जो खुले अंतरिक्ष में बाहर निकलकर घूम-फिर सकेंगे और उपग्रहों के विभिन्न कल-पुर्जों और हिस्सों को बदल सकेंगे। इन अंतरिक्ष-यात्रियों की पोशाक पर ऐसे यंत्र-उपकरण लगे होंगे, जिनकी सहायता से वे उपग्रहों का अपनी सुविधानुसार संचालन कर सकेंगे। आम तौर पर वे दो सप्ताह तक अन्तरिक्ष में रहेंगे। मरम्मत अभियानों पर जाने वाले ये अन्तरिक्ष-यात्री आम तौर पर उन उपग्रहों की मरम्मत का काम करेंगे जो अंतरिक्ष में रहकर पृथ्वी पर नज़र रखते हैं या पृथ्वी के मौसम की भविष्यवाणी करने के काम आते हैं। इन अन्तरिक्ष यानों का दूसरा उद्देश्य अन्तरिक्ष में उपस्थित कूड़े की सफ़ाई करना होगा। रूसी अन्तरिक्ष कारपोरेशन “एनेर्गिया” के अध्यक्ष के वैज्ञानिक सलाहकार वीक्तर सिन्याव्स्की ने बताया
अंतरिक्ष में स्थापित किए गए वे पुराने उपग्रह जो अब अनुपयोगी हो गए हैं, अंतरिक्ष में लगातार घूमते हुए बड़ा ख़तरा पैदा करते हैं। इन सभी को एक जगह इकट्ठा करके इन्हें एक विशेष यंत्र के माध्यम से समुद्र में डुबो देना चाहिए। इस तरह पृथ्वी की परिधि को साफ़ किया जा सकता है।
पृथ्वी के चारों तरफ़ अन्तरिक्ष में आजकल विभिन्न उपग्रहों और राकेटों के करीब 6 लाख टुकड़े घूम रहे हैं, जिनका आकार एक सेंटीमीटर और उससे बड़ा है। विशेषज्ञ इन में से 19 हज़ार बड़े-बड़े टुकड़ों पर नज़र रखते हैं, जिनका वज़न कई किलो तक है। लेकिन नन्हे-नन्हे टुकड़े भी अन्तरिक्ष यात्रियों की अन्तरिक्ष-पोशाक में छेद कर सकते हैं। अन्तरिक्ष कूड़े की यह समस्या दिन-ब-दिन तीख़ी होती जा रही है। वीक्तर सिन्याव्स्की ने कहा –
समय के साथ-साथ कूड़ा बढ़ता जा रहा है। अन्तरिक्षीय कूड़े के ये टुकड़े जब एक-दूसरे से टकराते हैं तो उनमें फिर टूट-फूट होती है। इस तरह कूड़ा बढ़ता जा रहा है और बढ़कर कई गुना होता जा रहा है क्योंकि जब अनुपयोगी राकेटों या उपग्रहों के अंश आपस में टकराते हैं तो वे कई-कई गुना अधिक टुकड़ों में बदल जाते हैं और ये टुकड़े नए उपग्रहों और अन्तरिक्ष यानों के लिए ख़तरा पैदा करते हैं। इसीलिए अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन के आस-पास लगातार जाँच की जाती है और करीब-करीब हर हफ़्ते अन्तरिक्ष में उड़ते कूड़े से अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन को बचाना पड़ता है। इसके इसलिए अन्तरिक्ष स्टेशन को उसके लिए तय परिधि से ऊपर हटाना पड़ता है।

Tuesday, 21 June 2011

तारें जमी पर

तारें जमी पर : प्राथमिक शालाओं में प्रवेशोत्सव के दोरान बच्चों की मासूम तस्वीरें |







Friday, 17 June 2011

VIGYAN PRASAR EduSAT Network Proposed schedule for the month of June 2011

VIGYAN PRASAR EduSAT Network Proposed schedule for the month of June 2011
Participating SIT
1. Monday 20.6.11 Video Show Kahani dharti ki

2. Thursday 23.6.11 Training programme on Disaster management Earthquake


3. Friday 24.6.11 Technical checking Hindi/ English Ms. Rita Technical person

4. Monday 27.6.11 Video Show Kahani dharti ki

5. Wednesday 29.6.11 Career Guidance in
Biological Science

भारत और रूस बनाएंगे हाइपरसोनिक मिसाइलें


12.06.2011, 18:27
© Flickr.com/IncMan/cc-by-sa 3.0
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रूसी-भारतीय संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस एक वर्ष के भीतर आवाज़ से भी तेज़गति से उड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों "ब्रह्मोस-2"  का निर्माण शुरू कर देगा। यह बात ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी के सह-निर्देशक अलेक्सांदर मक्सीचोव ने रविवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कही।
रूसी-भारतीय मिसाइल ब्रह्मोस की पहली उड़ान की 10वीं वर्षगाँठ को समर्पित एक सम्मेलन के मौके पर अलेक्सांदर मक्सीचोव ने कहा- "यह पूरी तरह से एक नई मिसाइल होगी।" उन्होंने कहा कि संयुक्त उपक्रम अगले साल ब्रह्मोस मिसाइलों का विमानों से प्रक्षेपण करने का इरादा रखता है।
एक योजना के अनुसार एसयू-30MKI विमान सहित विभिन्न प्रकार के विमानों को  ऐसी मिसाइलों से लैस किया जाएगा। इससे पहले, ब्रह्मोस कंपनी के प्रमुख एस. पिल्लै ने कहा था कि विमानों को मिसाइलों से लैस करने का काम वर्ष 2013 में पूरा किया जा सकता है। भारत की नौसेना, थलसेना और वायुसेना के पास पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइलें मौजूद हैं।

परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए जोख़िम उठाना उचित है


16.03.2011, 15:21
© www.atomstroyexport.ru
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रूस और भारत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण करने के लिए दिल्ली को 4 अरब डॉलर का ऋण देने की संभावना पर सोच-विचार कर रहे हैं। इस बात की जानकारी मंगलवार को रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पूतिन ने दी है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस पहले ही भारत को 2.6 अरब डॉलर का ऋण प्रदान कर चुका है। इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए रेडियो रूस के समीक्षक गिओर्गी वानेत्सोव ने लिखा है-
यह बात शायद कई लोगों को अजीब लग रही होगी कि जापान में आए भूकंप के कारण परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में हुए विस्फोटों के बाद भी दुनिया में बड़े पैमाने पर नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण करने की बात की जा रही है। निश्चित रूप से इस काम में हमेशा से ही जोखिम तो रहा है लेकिन भारत, चीन, तुर्की, पाकिस्तान, वियतनाम और दुनिया के कई ऐसे दूसरे देश क्या करें जिनके पास प्राकृतिक ऊर्जा संसाधन बहुत कम हैं?  ये देश परमाणु ऊर्जा पैदा करके ही बिजली के क्षेत्र में अपनी आवश्कताओं की पूर्ति कर सकते हैं। आधुनिक तक्नोलौजी काफ़ी विकसित और सुरक्षित बनती जा रही है। इसकी बदौलत परमाणु बिजलीघरों में दुर्घटनाओं के जोखिम बहुत कम हो गए हैं और भविष्य में और भी कम हो जाएँगे। रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पूतिन ने इसी बात की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा-
जापानी परमाणु बिजलीघर और इन में लगे उपकरण चालीस साल पुराने हैं। आजकल दुनिया में इनसे कहीं बेहतर परमाणु रिएक्टर मौजूद हैं। यह बात साबित कर दी गई है कि परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को बेहद सुरक्षित बनाया जा सकता है। आधुनिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा विशेष ढंग से की जाती है। इसलिए जापानी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों जैसी स्थिति उत्पन्न होने की कोई सम्भावना नहीं है।
आजकल दुनिया भर में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए अलग अलग चरणों पर 62 परमाणु रिएक्टरों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा भविष्य में 300 से अधिक नए रिएक्टरों के निर्माण के लिए परियोजनाओं पर चर्चा की जा रही है। रूस, चीन, भारत और दुनिया के कुछ अन्य देशों में राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा व्यवस्था के आधुनिकीकरण के कार्यक्रमों को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। भारत, वियतनाम, तुर्की और बुल्गारिया में जो परमाणु बिजलीघर बनाए जा रहे हैं रूस उनके निर्माण में सहायता कर रहा है। यह बात अभी स्पष्ट नहीं है कि इन कार्यक्रमों में किस हद तक परिवर्तन किया जा सकता है। लेकिन रूस और चीन जैसे अग्रणी देशों ने इस बात की स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वे जापान में घटी दुर्घटना के बावजूद नई पीढ़ी के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के अपने कार्यक्रमों का त्याग नहीं करेंगे।
निकट भविष्य में भारत के दक्षिण में रूस की तकनीकी सहायता से बनाए जा रहे कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर के पहले दो युनिट चालू हो जाएँगे जिनमें से प्रत्येक की उत्पादन क्षमता एक-एक हज़ार मेगावाट होगी। इन दो युनिटों के अलावा अगले पांच से सात साल में दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से भारत में 16 और परमाणु रिएक्टरों का निर्माण किया जाना है। नए परमाणु बिजलीघरों को सबसे आधुनिक और उन्नत उपकरणों से लैस किया जाएगा और सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाएगी। अन्य बातों के अलावा कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर के पहले दो यूनिटों में तीसरी पीढ़ी के रिएक्टर स्थापित किए गए हैं जो बहुत ही उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस संबंध में रूस की रोसएटम कंपनी के संचालक सेर्गेय किरिएन्का ने कहा-
कुडनकुलम में एक अद्वितीय सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जा रही है। इस प्रकार की सक्रिय और निष्क्रिय सुरक्षा प्रणाली इससे पहले कहीं भी स्थापित नहीं की गई है। नए परमाणु बिजलीघरों में अति आधुनिक और उन्नत किस्म के उपकरण लगाए जा रहे हैं जो उनके काम को भी सुरक्षित बनाते हैं।
यह बात भी भारतीय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन को सुरक्षित बनाती है कि वे ऐसे इलाकों से बहुत दूर स्थित हैं जहाँ भूकंप आने की संभावना बनी रहती है। इन परमाणु बिजलीघरों में सुरक्षा की स्थिति पर मुंबई स्थित एक विशेष उपग्रह केंद्र द्वारा ऑनलाइन निग़ारानी रखी जाती है।

भारत ने रूस के साथ मिलकर एक संयुक्त सेटलाइट का प्रक्षेपण किया


20.04.2011, 14:15
© Bruce Tuten / flickr.com
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भारत ने रूस के साथ मिलकर एक संयुक्त सेटलाइट “यूथसैट” का प्रक्षेपण किया। इस सेटलाइट के ज़रिए पृथ्वी पर ऐसी जानकारी भेजी जाएगी जिस से पता चलेगा कि सौर गतिविधि में बदलाव से पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी परतों पर क्या असर पड़ता है। इस परियोजना में मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी रूसी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिन्होंने इस सेटिलाइट के लिए एक्स-रे और गामा-किरण बहाव मापक यंत्र “सोलराद” का निर्माण किया है। इसके अलावा “यूथसैट” सेटलाइट में आयन मापक यंत्र तथा एयरग्लो यानी पृथ्वी के वायुमंडल के चमक की छवियों को प्राप्त करने के लिए एक यंत्र भी लगा हुआ है। दक्षिणी भारत में स्थित आंध्र यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी “यूथसैट” सेटलाइट से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर रहे हैं।

रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ाने की ज़रूरत है


सेंट पीटर्सबर्ग में हो रहे पीटर्सबर्ग अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक फ़ोरम के अन्तर्गत 'रूस-भारतीय व्यापारिक बातचीत' में बोलते हुए रूस के उपप्रधानमंत्री सेर्गेय इवानोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच आपसी व्यापार में दिखाई दे रही ढील को दो देशों के व्यापारियों को मिलकर दूर करना चाहिए और मशीन-निर्माण, औषध-निर्माण तथा विमान-निर्माण के क्षेत्र में हमें आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए। हालाँकि आज भी यह कहा जा सकता है कि दो देशों के बीच व्यापारिक-आर्थिक सम्बन्ध सफ़लतापूर्वक विकसित हो रहे हैं। हम सूचना व संचार तक्नोलौजी, भारी मशीन-निर्माण तथा औषध-निर्माण के क्षेत्र में कुछ परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। लेकिन पिछले वर्ष के अंत में आपसी व्यापार में कुछ कमज़ोरी दिखाई दी है, जिसकी वज़ह से चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि इसका कारण शायद दुनिया में कीमतों में हो रही वृद्धि है। रूस के उपप्रधानमंत्री ने कहा- हमें आपसी व्यापार की दिशाएँ बदलने की कोशिश करनी चाहिए।
सेर्गेय इवानोव ने बताया कि रूस भारत को आम तौर पर मशीन-निर्माण उद्योग से सम्बन्धित मशीनों और यंत्र-उपकरणों का निर्यात करता है। हमारे व्यापार में तेल और गैस का हिस्सा सिर्फ़ पाँच प्रतिशत है। उसी समय रूस में भारत की करीब 800 तरह की दवाइयाँ पंजीकृत हैं और वे रूस में काफ़ी लोकप्रिय हैं क्योंकि उनकी क़ीमत कम है और क्वालिटी बढ़िया है। रूस के उपप्रधानमंत्री ने कहा औषधि क्षेत्र में रूस और भारत व्यापक स्तर पर सहयोग कर सकते हैं। भारतीय व्यापारियों को न केवल रूस को दवाइयों की आपूर्ति बढ़ाने में दिलचस्पी दिखानी चाहिए, बल्कि रूस में संयुक्त औषधि-निर्माण कारखाने भी खोलने चाहिए ताकि रूसी विशेषज्ञों द्वारा खोजी जाने वाली नई दवाओं  का भी मिलकर उत्पादन किया जा सके। सेर्गेय इवानोव ने भारत में बड़ी रूसी कम्पनी "ए०एफ़०के० सिस्तेमा" के सफ़ल काम  की चर्चा की, जो MTS के नाम से भारत में मोबाइल फ़ोन सुविधाएँ उपलब्ध कराती है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, मोटर-निर्माण, सड़क-निर्माण तथा मेट्रो-निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय रूसी कम्पनियाँ भी भारत में बड़ी सक्रियता के साथ सफ़लतापूर्वक काम कर रही हैं। सेर्गेय इवानोव ने कहा कि रूस और भारत लड़ाकू-विमानों के निर्माण के क्षेत्र में भी अच्छा सहयोग कर रहे हैं और अब इस सहयोग को नागरिक विमान निर्माण क्षेत्र में विकसित करना चाहिए।  

20 करोड़ की कार से भारत पहुंची एस्टन मार्टिन


ब्रिटेन की लक्जरी स्पोर्ट्स कार कंपनी एस्टन मार्टिन भारत पहुंची. फरारी, बुगाती और लम्बोर्गिनी के बाद एस्टन मार्टिन भी भारतीय रईसों को ग्राहक के रूप में देखने लगी है. भारत में उसकी सबसे सस्ती कार 1.55 करोड़ रुपये की होगी.

 
हॉलीवुड फिल्मों में एस्टन मार्टिन की कारें जेम्स बॉन्ड चलाते आए हैं. अब एस्टन मार्टिन भारी जेबों के साथ दुनिया भर के शौक पालने वाले भारतीयों रईसों को भी बॉन्ड जैसा फील देने की तैयारी में हैं. शुक्रवार को एस्टन मार्टिन ने दुनिया में तेजी से उभरते भारतीय कार बाजार में एक साथ तीन मॉडल उतारने का एलान किया.
मुंबई में एस्टन मार्टिन चीफ कमर्शियल अफसर ने कहा, ''भारत हमारे लिए एक नए मौके की तरह है.'' कंपनी भारत में 1.55 करोड़ रुपये वाली V8 वैंटेज और 2.15 करोड़ रुपये की रैपिडी उतारेगी. सबसे महंगा मॉडल वन-77 होगा जिसकी शोरूम कीमत 20 करोड़ रुपये होगी. टैक्स आदि मिलाकर यह गाड़ी करीब 22 करोड़ की बैठेगी.
कंपनी का कहना है कि आगे और भी मॉडल भारत में उतारे जाएंगे. मुंबई में एस्टन मार्टिन के डीलर ललित चौधरी कहते हैं, ''भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसेनजरअंदाज नहीं किया जा सकता.'' डीलर से दूर एस्टन मार्टिन के अधिकारियों ने भारत में कितनी बिक्री होगी, इसका अंदाजा लगाने से इनकार कर दिया.
एस्टन मार्टिन अपने 97 साल के इतिहास में अब तक 55,000 कारें ही बेच सकी है. कंपनी को उम्मीद है कि कुछ कारें भारत में भी बिकेंगी और उसकी सेल में इजाफा होगा. एस्टन मार्टिन की स्थापना 1914 में हुई थी. फिलहाल 42 देशों में एस्टन मार्टिन के 134 डीलर हैं.

सेहत से ज्यादा कार का ख्याल रखते हैं अमेरिकी


अमेरिकी पुरुषों को अपनी सेहत से ज्यादा अपनी कार की चिंता होती है. एक तिहाई पुरूष हेल्थ चेक अप के लिए डॉक्टर के पास जाना पसंद ही नहीं करते. एक ताजा सर्वे से बेहद रोचक बातें सामने आई है.

 
करीब 70 फीसदी अमेरिकी कहते हैं कि वह अपनी कार का ख्याल रखना ज्यादा आसान समझते हैं बनिस्बत अपनी सेहत का. एक सर्वे से ये रोचक बातें सामने आई हैं. सर्वे में शामिल 40 फीसदी लोग कहते हैं कि वे अपनी सेहत से ज्यादा अपनी कार से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना पसंद करेंगे.
नेशनल एसोसिएशन फॉर स्टॉक कार ऑटो रेसिंग के ड्राइवर टेरी लेबोनेट कहते हैं, "कई पुरुषों को हेल्थ कराने से ज्यादा आसान गाड़ी चलाना लगता है."  लेबोनेट का नाम नेशनल एसोसिएशन फॉर स्टॉक कार ऑटो रेसिंग के शीर्ष 50 ड्राइवरों में शामिल हैं. वह इस खास सर्वे के प्रवक्ता हैं.
यह सर्वे पुरुष के स्वास्थ्य से संबंधित एक पत्रिका और दवा कंपनी ने कराया है जिसका मकसद पुरुषों को डॉक्टर के पास जाने के लिए प्रोत्साहित करना है. 45 से 65 वर्ष की उम्र के बीच के 501 पुरूष और उनकी पत्नियों से इस सर्वे में सवाल किए गए. पता चला कि 28 फीसदी पुरूष डॉक्टर के पास नियमित रूप से नहीं जाते हैं.
वहीं सर्वे में शामिल किए गए पुरूषों की 40 फीसदी पत्नियों के मुताबिक वे अपने पति या साथी की सेहत को लेकर चिंता करती हैं. इतनी ही महिलाओं ने कहा है कि वे अपनी सेहत से ज्यादा अपने पति या साथी की सेहत की चिंता करती हैं.

एप्पल का सतरंगी बादलः आईक्लाउड


आईफोन और आईपैड बनाने वाली एप्पल ने अपने ग्राहकों को आईक्लाउड के तौर पर खूबसूरत तोहफा दिया है. इस एप्लीकेशन से सभी उपकरण एक साथ अपडेट हो सकते हैं. एप्पल सीईओ स्टीव जॉब्स ने खुद इस एप्लीकेशन को पेश किया.

 
पहले से कहीं दुबले दिख रहे जॉब्स जब हर बार की तरह इस बार भी पूरी बाजू वाली काली टी शर्ट और डेनिम की जीन्स में स्टेज पर पहुंचे, तो हॉल में जमा करीब पांच हजार लोगों ने खड़े होकर और तालियां बजा कर उनका स्वागत किया.
आईक्लाउड ऐसा एप्लीकेशन है, जिससे एप्पल के सभी उपकरण एक साथ अपडेट किए जा सकते हैं. मिसाल के तौर पर आईफोन का कोई कांटैक्ट अपडेट किया जाता है, तो यह सर्वरों में रिकॉर्ड हो जाएगा और इसके बाद खुद ब खुद आईपैड या मैकबुक जैसे दूसरे उपकरणों को भी अपडेट कर देगा. यह सारा काम वायरलेस तरीके से होगा और जाहिर है कि इसमें इंटरनेट की मदद होगी.
आम तौर पर किसी एक उपकरण को अपडेट करने के बाद किसी दूसरे उपकरण में स्टोर उसी डाटा को अलग से अपडेट करना होता है. लेकिन आईक्लाउड ने इस मुश्किल को हल कर दिया है.

छोटी छोटी बातें


छोटी छोटी बातें
होबअल्लाह का कहना है कि इसके अलावा लोगों को छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि ऊर्जा की खपत को कम किया जा सके. ठंडे देशों में खिडकियां ऐसी दिशा में बनाई जाएं जहां से धूप सबसे अधिक आती हो और गर्म देशों में ऐसी दिशा में जहां छाया रहती हो. "आप हर जगह एक ही तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकते. आप अगर सोचें कि जर्मन तकनीक को बुर्किना फासो ले जाएंगे और वहां भी उसी रफ्तार से काम करेंगे तो ऐसा तो नहीं हो सकता, लेकिन बुर्किना फासो जा कर यह तो समझा ही सकते हैं कि इमारतों पर शीशे लगाना कम कर दें तो एयर कंडिशनर की खपत कम हो सकेगी."
सीमा से अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित करने पर लोगों को कार्बन क्रेडिट खरीदने होंगे. कार्बन क्रेडिट यानी पैसा दे कर और कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की अनुमति खरीदनी होगी. इस तरह का सिस्टम कारखानों के लिए पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है. अब इसे घरों पर भी लागू किया जाएगा.

प्रदूषण कम करने के लिए नये घर |


घर में बिजली और पानी की खपत का रिकॉर्ड रखने के लिए मीटर लगाए जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक नए प्रस्ताव के बाद अब ऐसे भी मीटर लग सकेंगे जो पूरी इमारत में कुल ऊर्जा की खपत का पता लगा सकेंगे.

 
गर्मी से निपटने के लिए एसी और सर्दी से निपटने के लिए हीटर - ये चीजें हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं. हमें इन्हें इस्तेमाल करते समय इस बात का एहसास नहीं होता कि हमारी ये जरूरतें पर्यावरण के लिए कितनी हानिकारक है. अगर हमें कोई ऐसी चीज मिल जाए जिसे देख कर यह पता लग सके कि हर दिन हम पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शायद इनकी खपत को कम कर सकें. संयुक्त राष्ट्र ने एक ऐसी ही तकनीक को मंजूरी दी है. यह मीटर यह भी बताएंगे कि उस इमारत से पर्यावरण में कितना कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित हुआ है.
क्या है कार्बन मेट्रिक
कार्बन मेट्रिक नाम की इस तकनीक पर काम कर रहीं संयुक्त राष्ट्र की मारिया एटकिंसन बताती हैं, "कार्बन मेट्रिक का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि इमारतों के मालिकों को इस बारे में पता चल सके कि वे ऊर्जा की कितनी खपत कर रहे हैं और वातावरण में कितनी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन हो रहा है. वे जान सकें कि क्या मैं सीमा में रह कर खपत कर रहा हूं या वातावरण को नुकसान पहुंचा रहा हूं."
Europa Österreich Stadt Hallstadt am Hallstätter See im Salzkammergut Oberösterreich Häuser und Kirche an See vor Bergen mit Wald Schnee Winter UNESCO-Welterbe Europe Austria town Hallstatt houses and church at lake mountains World Heritage Site
यूरोपी

जून माह की पहेली


पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप खेला गया था. फुटबॉल पुरूषों का खेल ही नहीं है. महिलाएं भी इस खेल को उसी शिद्दत से खेलती हैं. जर्मनी की महिला टीम दो बार वर्ल्ड कप जीत चुकी है.

 
हमारी जून माह की पहेली का सवाल भी इसी विषय से जुड़ा है. दीजिये इस आसान से सवाल का जवाब और जीतिए कलाई घड़ी व आइपॉड जैसे पुरस्कार.
सवाल: इस साल छठा वुमेन्स फुटबॉल वर्ल्ड कप किस देश में खेला जा रहा है?
            ए. जर्मनी
            बी. अमेरिका
            सी. नॉर्वे
अपने जवाब 30 जून 2011 तक डाक, ईमेल या एसएमएस के जरिए हमें भेज दें. विजेताओं के नाम हमारी वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे. सभी विजेताओं को पत्र से सूचना भी दी जाएगी. आप अपना नाम और पता साफ साफ अक्षरों में लिखें.
dw hindi

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क समर सायंस फेस्टिवल

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क समर सायंस फेस्टिवल में ओरिगामी, फन विथ मेथ्स, फन विथ इलेक्ट्रोनिक्स , फन विथ केमिकल के कई प्रयोग एक्सपर्ट्स द्वारा बताये गए | बच्चों ने बहो आनंद प्राप्त किया | 







Tuesday, 31 May 2011

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क की ओर सें समर सायन्स फेस्टिवल

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क की ओर सें समर सायन्स फेस्टिवल का आयोजन किया गया है | 
१६ मई -१० जून २०११ तक के इस कार्यक्रम में नई दिल्ही स्थित प्रमुक स्टूडियो सें कार्यक्रमों का टु वे 
ऑडियो विडिओ कोम्युनिकाशन द्वारा प्रसारण किया जायेगा | समग्र भारत में इस प्रकार सें कुल ५४
SIT (सेटेलाईट इंटरेक्टिव टर्मिनल ) मेंसें गुजरात में एक मात्र भुज जिल्ला शिक्षा ओर प्रशिक्षण भवन  में स्थित है | 
Vigyan Prasar EduSAT Network  Summer Science Festival
16 May -10 June 2011
S.N.
Monday  1.
16.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 2.
18.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami 
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 3.
19.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Friday 4.
20.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Monday  5.
23.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Tuesday 6.
24.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 7.
25.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 8.
26.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Friday 9.
27.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Monday  10.
30.5.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Tuesday 11.
31.5.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 12.
1.6.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 13.
2.6.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’sFriday 14.
3.6.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Monday  15.
6.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry 
group 11 to 15
All SIT’s
Tuesday 16.
7.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 17.
8.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 18.
9.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s
Friday 19.
10.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s

रेडियो जापान (एन. एच. के.) हिंदी कार्यक्रम

रेडियो जापान (एन. एच. के.) हिंदी कार्यक्रम का समय और फ्रिक्वंसी में परिवर्तन |



रेडियो के लिए फ्रीक्वेंसी और कार्यक्रम सूची

प्रसारण समय और फ्रीक्वेंसी

भारतीय समयजापानी समयप्रसारण क्षेत्रफ्रीक्वेंसी
20:00 - 20:4523:30 - 00:15दक्षिण एशिया15745 किलोहर्ट्ज़ 
(19 मीटर बैंड)
07:00 - 07:3010:00 - 10:30दक्षिण एशिया11740 किलोहर्ट्ज़ 
(25 मीटर बैंड)

कार्यक्रम सूची

सोमवारमंगलवारबुधवारबृहस्पतिवारशुक्रवारशनिवाररविवार
समाचार और सामयिक वार्ता (15 मिनट)
कार्यक्रम (30 मिनट)
सरल जापानीजापान दर्पण

विज्ञान और प्रौद्योगिकी
/ नए कारोबार
जापान दर्पण

समसामयिक / सामाजिक
/ साँस्कृतिक विषय
जापान दर्पण

समसामयिक / सामाजिक
/ साँस्कृतिक विषय
आओ पकाएँ जापानी खाना
या
अद्भुत जापान में आपका स्वागत है
(1)
आओ सीखें जापानी गीत
या
सुर बहार
( जापान का संगीत )
या
इन्द्रधनुष
( जापानी पॉप सँस्कृति ) (2)
चैरी के देश से
( श्रोताओँ के पत्रों के उत्तर )
आवाज़ों की दुनियाकहानियों का पिटारासवालों में जापान
सबरस

(1) आओ पकाएँ जापानी खाना, और अद्भुत जापान में आपका स्वागत है, हर सप्ताह बारी बारी से । वैबसाइट पर जानकारी उपलब्ध है ।
(2) प्रथम शनिवारः आओ सीखें जापानी गीत, अंतिम शनिवारः इन्द्रधनुष, शेष सप्ताह सुर बहार