Monday, 16 April 2012

Exposer visit 50 Girls of Mirzapar CRC School Mundra Adani Port, Shyamji Krishn Verma smark and Mandvi Beach.


સી.આર.સી. મીરઝાપર દ્વારા આયોજિત એક્સપોઝર વિઝીટ 
માં મુન્દ્રા અદાની પોર્ટ, ક્રાન્તીતીર્થ શ્યામજી કૃષ્ણ વર્મા સ્મારક , ધ્રબુડી તીર્થ, માંડવી બીચ પર ૫૦ કન્યાઓ અને ૧૫ શિક્ષકો સામેલ થયેલ.  
નેશનલ ટ્રાવેલ્સ ની લક્ઝરી સ્લીપર બસ માં મુસાફરી કરવામાં આવી .
દરેક બાળાઓને નાસ્તા, ભોજન, આઈસ્ક્રીમ ની સાથે એક સાઈડ બેગ અને બોલપેન, રજીસ્ટર આપવામાં આવેલ. 



















Ujjain Tirth


ઉજ્જૈન તીર્થ 

ક્ષિપ્રા નદી ને કિનારે 
એક અદ્ભુત ભક્તિ , શ્રદ્ધા અને વૈરાગ્ય નું સંગમ 









World Heritage : Sanchi Stupa in Madhypradesh. 52 KM away from Bhopal.

વિશ્વ વિરાસત : સાંચી નો સ્તુપા .
ભોપાલ થી ૫૨ કી.મી. દુર આવેલ છે. 
બૌધ ધર્મ ના ૨૦૦૦ વર્ષ પહેલા ના અવશેષો આ સ્તૂપ માં જોવા મળે છે.
સ્તૂપ ની આગળ તોરણ અને તેમાં શિલ્પકલા અદ્ભુત છે. સ્તૂપ ની ગોળ ગુંબજ આકાર ની રચના અદ્વિતીય છે. 
આ સ્થાન ને યુનેસ્કો એ વર્લ્ડ હેરીટેઝ માં સ્થાન આપેલ છે.


World heritage : Bhojpur Shiv Temple near Bhopal Madhypradesh.

વિશ્વ વિરાસત : ભોજપુર નું  શિવ મંદિર . ભોપાલ થી ૩૨ કી.મી. ના અંતરે આવેલ છે. 

આ શિવ મંદિર માં શિવલિંગ દુનિયા નું સૌથી મોટું ગણાય છે.




વિજ્ઞાન પ્રસાર એજ્યુંસેટ નેટવર્ક ના નેશનલ વર્કશોપ માં ભાગ લેતા કચ્છ ના પ્રતિનિધિ

વિજ્ઞાન પ્રસાર એજ્યુંસેટ નેટવર્ક ના નેશનલ વર્કશોપ માં ભાગ લેતા કચ્છ ના પ્રતિનિધિ 
(૧) ભૂપેશભાઈ ગોસ્વામી , બી.આર.સી. કો. ઓર્ડીનેટર -ભુજ
(૨) નાનજી જાજાણી, સી.આર.સી. કો. ઓર્ડીનેટર-મીરઝાપર 
(૩) હરીલાલ પટેલ ,  સી.આર.સી. કો. ઓર્ડીનેટર- દેશલપર  

આ વર્કશોપ માં સમગ્ર ભારત માંથી ૨૨ એસ. આઈ. ટી. ના કુલ ૬૦ જેટલા પ્રતિનિધિઓ એ ભાગ લીધેલ . 
વર્ષ ૨૦૧૧-૧૨ ની કામગીરી ની રીવ્યુની દૃષ્ટિ એ ભુજ એસ. આઈ. ટી. વિજયવાડા (આંધ્રપ્રદેશ ) બાદ બીજા ક્રમે આવેલ. 
એન. જે. જાજાણી એ બ્લોગ અને ડોક્યુમેન્ટ નું પ્રેજન્ટેશન કરેલ.



વિજ્ઞાન પ્રસાર એજ્યુંસેટ નેટવર્ક ના નેશનલ વર્કશોપ 

માં ભુજ એસ. આઈ. ટી.નું  એન. જે. જાજાણી એ 


બ્લોગ અને ડોક્યુમેન્ટ નું પ્રેજન્ટેશન કરેલ.




Wednesday, 25 January 2012

NANJI JANJANI ON VOICE OF RUSSIA ENGLISH SERVICE


The Voice of Russia brings Russia and India together

Dec 1, 2011 22:24 Moscow Time
© penmachine/ flickr.com
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The 2011 All India Conference of The Voice of Russia Listeners’ Clubs is under way in New Delhi, in an event attended by representatives of more than 150 such clubs from all across the country. Speaking at the Conference on Thursday, All India Congress Committee secretary Dalbir Singh called the Voice of Russia Listeners’ Clubs a “unique event that proves the fact that Indians are greatly interested in Russia.”
The two countries will soon mark the 70th anniversary of the beginning of the VOR’s broadcastings in India, where several generations of Indians came to love Russia when listening to this radio. Thanks to the VOR’s cooperation with the local radio station FEVER 104 FM, the VOR is now available on FM waves and on cell phones.
India’s close partnership with Russia helps us to better understand each other and address issues of common interest, Dalbir Singh says.
In an interview with the Russia & India Report newspaper published on Thursday, VOR chairman Andrei Bystritsky said that The Voice of Russia had won its listeners’ trust because it reports the latest international news and highlights on the most important events in Russia’s public life, as well as on scientific and cultural achievements. “This gives inquisitive Indians a brilliant opportunity to obtain first-hand information about their Motherland’s role in geopolitics. India is a classical example of a country where the number of radio listeners grows with every passing year. This is a country which develops rapidly and which at the same time preserves its national identity. Like other developing countries, India will not be able to provide access to the Internet to all those hungry for information in the immediate future. Listening to radio programs does not require spending too much on necessary equipment because a simple receiver set is good value and available for all. During his visit to India in 2010, Russian Prime Minister Vladimir Putin praised the innovative approach by Russian media companies operating in foreign countries, including India. For example, the MTS corporation broadcasts live Russian programs. Also, Putin stressed the necessity of increasing the number of broadcast languages in India, where the Voice of Russia is available in the FM format in four of the largest cities and their suburbs, including New Delhi, Mumbai, Kolkata and Bangalore,” Andrei Bystritsky concludes.
Right now, The Voice of Russia’s programs are available on RADIO FEVER 104 FM to more than 30 million people – a figure that is almost certain to grow given the fact that both radio stations have started working on a new format of programs about Russia, explains Saurab Mishra, a representative of the Indian radio station.
During a conference of the Voice of Russia at the Russian Scientific and Cultural Center, the winners of a VOR quiz were announced.  They included schoolteacher Nanji Janjani from the Gujarat state who said that actually, the VOR prize had been won by all those in his school. “Young Indians, he added, want to know more about Russia. They enjoy listening to your radio station which brings India and Russia together . Unlike other stations, the Voice of Russia offers live Internet broadcastings which prompt us and our neighbors to visit the VOR’s website daily,” Janjani concludes.

सूरज पर शक्तिशाली भूचुंबकीय तूफ़ान


सूरज पर शक्तिशाली भूचुंबकीय तूफ़ान

विषय: पर्यावरण (19 टिप्पणियाँ)
 
24.01.2012, 11:31
© www.nasa.gov

नासा के वैज्ञानिक उपग्रहों ने सूरज की सतह पर हुए तीव्र विस्फोट के बाद वहाँ से हुई उच्च-ऊर्जा विकिरण को दर्ज किया है। वहाँ से 22 जनवरी को प्रोटोन, इलेक्ट्रोन और भारी तत्वों का उत्सर्जन भी हुआ है। इस उत्सर्जन का प्रवाह, मॉस्को समयानुसार, आज शाम छः बजे पृथ्वी तक पहुँच जाएगा। यह पृथ्वी पर चुंबकीय तूफान ला सकता है। अमरीका के राष्ट्रीय समुद्र और वायुमंडलीय अनुसंधान कार्यालय के अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान केंद्र ने सोमवार को यह चेतावनी दी।
सूरज से निकलनेवाली इस तरह की प्रकाश किरणें उपग्रहों के उपकरणों और स्थलीय संचार साधनों के कार्य में रुकावट ला सकती हैं, लेकिन उन्हें नुक्सान पहुँचने का कोई सीधा ख़तरा नहीं है।

Nanji Janjani on Voice of Russia

http://hindi.ruvr.ru/listen_audio/64535374.html

मित्रो का क्लब में नानजी जानजानी के पत्र का उत्तर ।

Saturday, 21 January 2012

रूसी लोग चाँद पर रहने की तैयारी कर रहे हैं


रूसी लोग चाँद पर रहने की तैयारी कर रहे हैं

विषय: यह बात दिलचस्प है (283 टिप्पणियाँ)
 
20.01.2012, 18:55
Photo: RIA Novosti

जल्दी ही रूसी वैज्ञानिक चाँद पर रहना शुरू कर देंगे। चाँद पर एक ऐसा मंडप बना दिया जाएगा, जिसमें मानव रह सकेगा। इसके लिए सन् 2020 तक दो अन्तरिक्ष यान चाँद पर भेजे जाएँगे, जिनके नाम रखे गए हैं— 'लूना रिसूर्स' और 'लूना ग्लोब'। रूस के अंतरिक्ष संगठन रोसकोसमोस के प्रमुख व्लदीमिर पपोवकिन ने यह जानकारी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि क़रीब 20 साल बाद पृथ्वी-वासी चाँद पर अपनी छुट्टियाँ बिताने के लिए आना-जाना शुरू कर देंगे। 
इस शताब्दी के तीसरे दशक में चाँद पर मंडप बनाने या स्टेशन बनाने की तकनीकी सुविधाएँ तैयार हो जाएँगी। आरम्भ में वैज्ञानिक  चाँद पर जाकर रहेंगे और चन्द्रमा की भौतिकीय, जैविक और भूवैज्ञानिक परिस्थितियों का अध्ययन करेंगे। धीरे-धीरे वहाँ रहने के लिए जीवन की परिस्थितियों के अनुकूल ढाँचा तैयार कर लिया जाएगा जो पर्यटकों के लिए भी सुविधाजनक होगा।
शुरू में चन्द्रमा का उपयोग करने की कोई परियोजना नहीं बनाई गई थी, लेकिन जब से पृथ्वी के इस प्राकृतिक उपग्रह के ऊपर पानी मिला है, वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष गोलक के बारे में दूसरे ही ढंग से सोचना शुरू कर दिया है। रूस की विज्ञान अकादमी के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान की लेबोरेटरी के प्रधान ईगर मित्रोफ़ानव ने बताया :
चन्द्रमा पर इस तरह का कोई बेस-स्टेशन बनाने से पहले हमें कुछ गंभीर अन्तरिक्ष परियोजनाओं को पूरा करना होगा और इसके साथ-साथ तक्नोलौजियों का भी गंभीर ढंग से विकास करना होगा। पहले क़दम के रूप में हम लूना रिसूर्स और लूना ग्लोब नामक दो अन्तरिक्ष यानों को चाँद पर उतारने की योजना बना रहे हैं। हम वहाँ ऐसे कुछ प्रयोग करना चाहते हैं जो चन्द्रमा के आगे उपयोग को और चन्द्रमा पर पाए जाने वाले संसाधनों के उपयोग को संभव बनाएँगे। चाँद पर भी चन्द्रमा के  ध्रुव-क्षेत्रों के मुक़ाबले  उसके भूमध्य रेखा-क्षेत्र में और उसके देशान्तर रेखा-क्षेत्र में परिस्थितियाँ पूरी तरह से अलग-अलग हैं, जहाँ पहले सोवियत और अमरीकी अभियान पूरे किए गए थे। चाँद के ध्रुवीय इलाकों में पानी पाया गया है। यह एक महत्त्वपूर्ण बात है और हमारे लिए इस खोज ने नई संभावनाओं के दरवाज़े खोल दिए हैं।
लोग चन्द्रमा की धरती पर रह सकते हैं। वहाँ न तो कोई ख़तरनाक अन्तरिक्ष रेडिएशन है और उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी वैसी ही है, जैसीकि पृथ्वी की है। चाँद की सतह पर कहीं आने जाने के लिए  विशेष अन्तरिक्ष पोशाक पहननी पड़ेगी, इसलिए यह मत सोचिए की चन्द्रमा पर धूप सेंकेने का मज़ा लिया जा सकेगा। रॉकेट-अन्तरिक्ष कारपोरेशन 'एनेर्गिया' के अध्यक्ष अलेक्सान्दर अलेक्सान्द्रोव ने बताया कि चन्द्रमा पर बेस-स्टेशन की ज़रूरत सामरिक  उद्देश्यों से होगी।  अलेक्सान्दर अलेक्सान्द्रोव ने कहा :
चन्द्रमा पर अपना अड्डा बनाना पृथ्वीवासियों का सामरिक उद्देश्य है। जैसे अन्टार्कटिक का अध्ययन करने के लिए हमने पहले वहाँ स्टेशन का निर्माण  किया था। मानव इन स्टेशनों पर कुछ दिनों के लिए ही जाकर रहता है। उसके बाद हम वहाँ कुछ ऐसे ढाँचे बना लेंगे जो पृथ्वीवासियों के लिए उपयोगी होंगे। इस तरह चन्द्रमा पर हम अपना बेस ज़रूर बनाएँगे।
चन्द्रमा पर बनाए जाने वाले बेस-स्टेशन का इस्तेमाल वहाँ से नए अन्तरिक्ष यानों को छोड़ने के लिए किया जा सकेगा। वहाँ से मंगल ग्रह की ओर या दूसरे ग्रहों की ओर हम अपने यान भेज सकेंगे।  और खगोलशास्त्री सूर्य और तारों का वहाँ से ज़्यादा बेहतर ढंग से अध्ययन कर सकेंगे। धीरे-धीरे मानव चन्द्रमा का औद्योगिक इस्तेमाल करना शुरू कर देगा। वहाँ खनिज पदार्थों की खुदाई की जा सकेगी,  वहाँ तरह-तरह के कारखाने लगाए जा सकेंगे और सबसे बड़ी बात है कि वहाँ ऐसा अंतरिक्ष अड्डा बनाया जा सकेगा, जहाँ से ब्रह्माण्ड के दूसरे कोनों की यात्रा करना भी संभव होगा। ईगर मित्राफ़ानव ने कहा :
चन्द्रमा पर बने अंतरिक्ष अड्डे से अन्तरिक्ष यानों को मंगल या अन्य ग्रहों की तरफ़ छोड़ना आर्थिक रूप से भी बड़ा फ़ायदेमन्द  और व्यावहारिक होगा। पृथ्वी की परिधि पर पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से मुक्त होना इन अंतरिक्ष यानों के लिए बड़ा कठिन होता है। इसलिए चन्द्रमा से उन्हें भेजना बेहद आसान हो जाएगा।
तो अब वैज्ञानिकों ने चाँद का इस्तेमाल करने के लिए परियोजनाएँ बनानी शुरू कर दी हैं। व्यावसायी तो अभी से चाँद पर ज़मीन भी बेचने लगे हैं और  ख़ूब कमा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति सिर्फ़ साढ़े सात हज़ार डॉलर में चाँद पर अपना प्लॉट ख़रीद सकता है। 

कम्प्यूटर और स्मार्टफ़ोन का ज़्यादा इस्तेमाल पाग़लपन की निशानी


कम्प्यूटर और स्मार्टफ़ोन का ज़्यादा इस्तेमाल पाग़लपन की निशानी

विषय: यह बात दिलचस्प है (283 टिप्पणियाँ)
Radio Russ : Voice of Russia 
17.01.2012, 10:27
वैज्ञानिकों का कहना है कि आज के हमारे इस ज़माने में जो लोग सोशल साइट्स और ऑन लाइन सम्पर्क के लिए हमेशा बेचैन रहते हैं और जिनका काम इनके बिना नहीं चलता, उन लोगों के दिमाग़ में भी बिल्कुल वही प्रक्रियाएँ घटती हैं, जो प्रक्रियाएँ शराबियों और नशेड़ियों के दिमाग़ के भीतर घटती हैं। ये वे लोग हैं, जिन लोगों के पास स्मार्टफ़ोन हैं और वे  बुरी तरह से उन पर निर्भर हो चुके हैं यानी उनके दिमाग़ में हर समय बस, स्मार्टफ़ोन ही रहता है, उन पर स्मार्टफ़ोन का नशा इतना ज़्यादा हॉवी हो गया है कि वे किसी और चीज़ के बारे में कुछ सोच ही नहीं सकते हैं। कहना चाहिए कि यह नए ज़माने का नया नशा है।

अगर आप भी अपने स्मार्टफ़ोन को और उसकी लगातार बजने वाली घंटी को लेकर बेचैन रहते हैं तो आपको आराम की ज़रूरत है। आप अभी समाज के लिए उपयोगी हैं, आप पूरी तरह से स्मार्टफ़ोन के नशे में डूबे नहीं हैं। लेकिन यदि आप इस बात पर चिड़चिड़े और बेचैन हो जाते हैं कि आपके फ़ोन पर कोई मैसेज क्यों नहीं आया, आपको कोई फ़ोन क्यों नहीं कर रहा है, तो आपको भी स्मार्टफ़ोन का नशा चढ़ चुका है, आप भी नशेड़ी हो चुके हैं।

इंगलैंड की वॉरचेस्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों एक दिलचस्प अनुसंधान किया। उन्होंने छात्रों से लेकर व्यापारियों और अफ़सरों तक उन सैकड़ों लोगों से बात की, जो आईफ़ोन और ब्लैकबैरी फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं। पता लगा कि ये सभी लोग लगातार तनाव में जीते हैं। ये लोग लगातार अपनी इलैक्ट्रोनिक पोस्ट की जाँच करते रहते हैं, सोशल साइट्स में बैठे रहते हैं और अपने काम से जुड़ी ख़बरें पढ़ते रहते हैं। वे लोग जो पल-पल में ऐसा करते हैं, उनके दिमाग़ के भीतर हर समय बहुत ज़्यादा तनाव बना रहता है। उनकी मस्तिष्क-तंत्रिका हर पल एक झनझनाहट-सी महसूस करती रहती है। उन्हें हर पल यही लगता रहता है कि उनके टेलिफ़ोन की घंटी घनघना रही है या उनकी जेब में रखा टेलिफ़ोन कँपकँपा रहा है, मानो उन्हें किसी से कोई संदेश मिला हो।

इस अनुसंधान के संचालक रिचर्ड बॉलिंग का कहना है कि यदि किसी कम्पनी के कर्मचारी लगातार इस तरह के तनाव में रहेंगे तो शायद ही वह कम्पनी आगे विकास कर पाएगी। इसलिए कम्पनियों के मालिकों और अफ़सरों को यह कोशिश करनी चाहिए कि उनके कर्मचारियों के मोबाइल फ़ोन समय-समय पर बंद रहें।

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के इस अनुसंधान की पुष्टि चीन के वैज्ञानिकों ने भी की है। उन्होंने भी अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है कि इंटरनेट पर आदमी की निर्भरता वैसी ही होती है, जैसेकि किसी शराबी को हर समय शराब की ज़रूरत होती है और नशेड़ी को नशे की। उस आदमी का मस्तिष्क, जो इंटरनेट के बगैर एक घंटा भी नहीं गुज़ार सकता, वैसे ही सक्रिय रहता है, जैसे कोकोइन का सेवन करने वाले व्यक्ति का मस्तिष्क। उसे भी हर समय नई डोज़ की ज़रूरत पड़ती है। और यह ज़रूरत धीरे-धीरे व्यक्ति के शरीर की स्थाई माँग बन जाती है। यदि ऐसे आदमी के स्मार्टफ़ोन की बैटरी डाउन हो जाती है तो उस आदमी का शरीर और दिमाग़ झनझनाने लगता है, भयानक विचार उसका पीछा करने लगते हैं, वह घबराहट महसूस करने लगता है, उसे पसीना आने लगता है और उसकी उँगलियाँ फ़ोन के बटन दबाने के लिए बेचैन होने लगती हैं और हरकत करना शुरू कर देती हैं जैसे फ़ोन पर कोई संदेश टाईप कर रही हों।

वैज्ञानिकों का मानना है कि आज हर दसवाँ इंटरनेट उपयोगकर्ता इस झमेले में फ़ँस चुका है। ऐसे लोगों का पता तुरन्त लगाया जा सकता है। ये लोग मॉनीटर पर घटने वाली घटनाओं के इतनी बुरी तरह से आदी हो चुके हैं कि पूरे-पूरे दिन बिना कुछ खाए-पीए कम्प्यूटर पर या अपने स्मार्टफ़ोन पर बैठे रहते हैं। उन्हें अपने खाने-पीने, नहाने-धोने, ओढ़ने-बिछाने की भी कोई सुध-बुध नहीं रहती है। चीन के मनोवैज्ञानिकों का तो यहाँ तक कहना है कि इंटरनेट पर निर्भर हो चुके इन लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से रोगी माना जाना चाहिए और इनके रोग का अलग से निदान और इलाज किया जाना चाहिए। चाहे  ये लोग  ख़ुद को रोगी मानें या न मानें, लेकिन इन लोगों को इलाज कराने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।

ब्रिटेन में तो ऐसे निशुल्क क्लिनिक काम भी करने लगे हैं, जहाँ इंटरनेट पर निर्भर मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि आम तौर पर इंटरनेट गेम्स खेलने वाले लोग इस तरह के मानसिक रोग का ज़्यादा शिकार होते हैं। कम्प्यूटर गेम्स खेलने वाले लोग अपने खेलों में इतने ज़्यादा मगन हो जाते हैं कि वे अपने आसपास की दुनिया को भी भूल जाते हैं, अपनी पढ़ाई और काम-धंधा छोड़ देते हैं, यहाँ तक कि अपने जीवनसाथी से भी तलाक ले लेते हैं ताकि वह उसे परेशान नहीं करे। इस तरह के रोगियों की पहचान आसान है। ये लोग बुरी तरह से थके हुए दिखाई देते हैं और इनकी नींद भी गायब हो जाती है क्योंकि ये दिन-रात कम्प्यूटर पर बैठे रहते हैं।

NANJI JANJANI WON THE RADIO JAPAN JAPANESE SONG COMPETITION 2012

atama kata hija ashi

रेडियो रूस की इंटरनेट प्रतियोगिताओं में भाग लें |


प्रिय दोस्तो, हम आप सभी को रेडियो रूस की दो नयी इंटरनेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिये आमंत्रित करते हैं। ये प्रतियोगिताएँ वर्ष 2012 की हर तिमाही आयोजित की जायेंगी।
पहली प्रतियोगिता का नाम है `रेडियो रूस की वेब साइट के सबसे सक्रिय यूज़र`।
हमारी वेब साइट पर प्रतिदिन रूस और दुनिया की घटनाओं पर टिप्पनियाँ और ताज़ा समाचार जारी किये जाते हैं। हम उनके बारे में आपकी राय जानना चाहते हैं। वेब साइट की सामग्री पर अपनी प्रतिक्रिया इस पते पर भेज दीजिये:letters@ruvr.ru 
कृपया अपनी राय विस्तार से बता दें। प्रत्येक तिमाही के अंत में प्रतियोगिता के निष्कर्ष निकालते वक्त इस बात को ध्यान में रखा जायेगा कि प्रत्येक प्रतियोगी ने हमारी वेब साइट को कुल मिलाकर कितनी बार देखा।
इस के अलावा हम आपको रेडियो रूस के श्रोता क्लबों की गतिविधियों को समर्पित फ़ोटो प्रतियोगिता में भी भाग लेने का निमंत्रण देते हैं। इस प्रतियोगिता के लिये फ़ोटो ऊपर्युक्त पते पर इमेल के ज़रिये भेज दीजिये।
प्रतियोगिता के सिये भिन्न भिन्न फ़ोटो भेजे जा सकते हैं। उदाहरण के लिये आप ऐसे फ़ोटो भेज सकते हैं जो आपके श्रोता क्लब की बैठकों में, रेडियो कार्यक्रम सुनते वक्त, उन पर विचार-विमर्श करते वक्त या क्लब द्वारा आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों के समय खींचे गये। उदाहरण के लिये हमें मालूम है कि हमारे बहुत से श्रोता वृक्षारोपण करते हैं, लोगों को रेडियो रूस के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हैं, दूसरे श्रोता क्लबों के सदस्यों से भेंटें करते हैं, सब मिलकर विभिन्न त्योहार तथा रूसी-भारतीय संबंधों की महत्त्वपूर्ण तिथियाँ मनाते हैं। इन सभी कार्य गतिविधियों को समर्पित फ़ोटो रूसी-भारतीय संबंधों के इतिहास की एक झलक दे सकते हैं। और हम खुशी से ये फ़ोटो रेडियो रूस की वेब साइट में दिखायेंगे।
प्रत्येक तिमाही के अंत में इन दो प्रतियोगिताओं के निष्कर्ष निकालकर विजेताओं के नाम घोषित किये जायेंगे और उनको पुरस्कार भेजे जायेंगे।
तो प्रिय दोस्तो, हम आशा करते हैं कि आप हमारी नयी प्रतियोगिताओं में ज़रूर भाग लेंगे! हम आपकी प्रतिक्रिया का बेसब्री के साथ इंतज़ार करेंगे।
18.01.2012, 18:03