Friday, 17 June 2011

एप्पल का सतरंगी बादलः आईक्लाउड


आईफोन और आईपैड बनाने वाली एप्पल ने अपने ग्राहकों को आईक्लाउड के तौर पर खूबसूरत तोहफा दिया है. इस एप्लीकेशन से सभी उपकरण एक साथ अपडेट हो सकते हैं. एप्पल सीईओ स्टीव जॉब्स ने खुद इस एप्लीकेशन को पेश किया.

 
पहले से कहीं दुबले दिख रहे जॉब्स जब हर बार की तरह इस बार भी पूरी बाजू वाली काली टी शर्ट और डेनिम की जीन्स में स्टेज पर पहुंचे, तो हॉल में जमा करीब पांच हजार लोगों ने खड़े होकर और तालियां बजा कर उनका स्वागत किया.
आईक्लाउड ऐसा एप्लीकेशन है, जिससे एप्पल के सभी उपकरण एक साथ अपडेट किए जा सकते हैं. मिसाल के तौर पर आईफोन का कोई कांटैक्ट अपडेट किया जाता है, तो यह सर्वरों में रिकॉर्ड हो जाएगा और इसके बाद खुद ब खुद आईपैड या मैकबुक जैसे दूसरे उपकरणों को भी अपडेट कर देगा. यह सारा काम वायरलेस तरीके से होगा और जाहिर है कि इसमें इंटरनेट की मदद होगी.
आम तौर पर किसी एक उपकरण को अपडेट करने के बाद किसी दूसरे उपकरण में स्टोर उसी डाटा को अलग से अपडेट करना होता है. लेकिन आईक्लाउड ने इस मुश्किल को हल कर दिया है.

छोटी छोटी बातें


छोटी छोटी बातें
होबअल्लाह का कहना है कि इसके अलावा लोगों को छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि ऊर्जा की खपत को कम किया जा सके. ठंडे देशों में खिडकियां ऐसी दिशा में बनाई जाएं जहां से धूप सबसे अधिक आती हो और गर्म देशों में ऐसी दिशा में जहां छाया रहती हो. "आप हर जगह एक ही तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकते. आप अगर सोचें कि जर्मन तकनीक को बुर्किना फासो ले जाएंगे और वहां भी उसी रफ्तार से काम करेंगे तो ऐसा तो नहीं हो सकता, लेकिन बुर्किना फासो जा कर यह तो समझा ही सकते हैं कि इमारतों पर शीशे लगाना कम कर दें तो एयर कंडिशनर की खपत कम हो सकेगी."
सीमा से अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित करने पर लोगों को कार्बन क्रेडिट खरीदने होंगे. कार्बन क्रेडिट यानी पैसा दे कर और कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की अनुमति खरीदनी होगी. इस तरह का सिस्टम कारखानों के लिए पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है. अब इसे घरों पर भी लागू किया जाएगा.

प्रदूषण कम करने के लिए नये घर |


घर में बिजली और पानी की खपत का रिकॉर्ड रखने के लिए मीटर लगाए जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक नए प्रस्ताव के बाद अब ऐसे भी मीटर लग सकेंगे जो पूरी इमारत में कुल ऊर्जा की खपत का पता लगा सकेंगे.

 
गर्मी से निपटने के लिए एसी और सर्दी से निपटने के लिए हीटर - ये चीजें हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं. हमें इन्हें इस्तेमाल करते समय इस बात का एहसास नहीं होता कि हमारी ये जरूरतें पर्यावरण के लिए कितनी हानिकारक है. अगर हमें कोई ऐसी चीज मिल जाए जिसे देख कर यह पता लग सके कि हर दिन हम पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शायद इनकी खपत को कम कर सकें. संयुक्त राष्ट्र ने एक ऐसी ही तकनीक को मंजूरी दी है. यह मीटर यह भी बताएंगे कि उस इमारत से पर्यावरण में कितना कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित हुआ है.
क्या है कार्बन मेट्रिक
कार्बन मेट्रिक नाम की इस तकनीक पर काम कर रहीं संयुक्त राष्ट्र की मारिया एटकिंसन बताती हैं, "कार्बन मेट्रिक का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि इमारतों के मालिकों को इस बारे में पता चल सके कि वे ऊर्जा की कितनी खपत कर रहे हैं और वातावरण में कितनी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन हो रहा है. वे जान सकें कि क्या मैं सीमा में रह कर खपत कर रहा हूं या वातावरण को नुकसान पहुंचा रहा हूं."
Europa Österreich Stadt Hallstadt am Hallstätter See im Salzkammergut Oberösterreich Häuser und Kirche an See vor Bergen mit Wald Schnee Winter UNESCO-Welterbe Europe Austria town Hallstatt houses and church at lake mountains World Heritage Site
यूरोपी

जून माह की पहेली


पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप खेला गया था. फुटबॉल पुरूषों का खेल ही नहीं है. महिलाएं भी इस खेल को उसी शिद्दत से खेलती हैं. जर्मनी की महिला टीम दो बार वर्ल्ड कप जीत चुकी है.

 
हमारी जून माह की पहेली का सवाल भी इसी विषय से जुड़ा है. दीजिये इस आसान से सवाल का जवाब और जीतिए कलाई घड़ी व आइपॉड जैसे पुरस्कार.
सवाल: इस साल छठा वुमेन्स फुटबॉल वर्ल्ड कप किस देश में खेला जा रहा है?
            ए. जर्मनी
            बी. अमेरिका
            सी. नॉर्वे
अपने जवाब 30 जून 2011 तक डाक, ईमेल या एसएमएस के जरिए हमें भेज दें. विजेताओं के नाम हमारी वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे. सभी विजेताओं को पत्र से सूचना भी दी जाएगी. आप अपना नाम और पता साफ साफ अक्षरों में लिखें.
dw hindi

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क समर सायंस फेस्टिवल

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क समर सायंस फेस्टिवल में ओरिगामी, फन विथ मेथ्स, फन विथ इलेक्ट्रोनिक्स , फन विथ केमिकल के कई प्रयोग एक्सपर्ट्स द्वारा बताये गए | बच्चों ने बहो आनंद प्राप्त किया | 







Tuesday, 31 May 2011

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क की ओर सें समर सायन्स फेस्टिवल

विज्ञानं प्रसार एज्युसेट नेटवर्क की ओर सें समर सायन्स फेस्टिवल का आयोजन किया गया है | 
१६ मई -१० जून २०११ तक के इस कार्यक्रम में नई दिल्ही स्थित प्रमुक स्टूडियो सें कार्यक्रमों का टु वे 
ऑडियो विडिओ कोम्युनिकाशन द्वारा प्रसारण किया जायेगा | समग्र भारत में इस प्रकार सें कुल ५४
SIT (सेटेलाईट इंटरेक्टिव टर्मिनल ) मेंसें गुजरात में एक मात्र भुज जिल्ला शिक्षा ओर प्रशिक्षण भवन  में स्थित है | 
Vigyan Prasar EduSAT Network  Summer Science Festival
16 May -10 June 2011
S.N.
Monday  1.
16.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 2.
18.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami 
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 3.
19.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Friday 4.
20.5.11
Ms. Chandarkala &  English/ Hindi Origami
Dr. Irfana Begum
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Monday  5.
23.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Tuesday 6.
24.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 7.
25.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 8.
26.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Friday 9.
27.5.11
Dr. T.V.V. & Ms.  English/ Hindi Fun with Maths 
Anshumala 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Monday  10.
30.5.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Tuesday 11.
31.5.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 12.
1.6.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 13.
2.6.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’sFriday 14.
3.6.11
Fun with 
Electronics
Mr. Kapil Tripathi   English/ Hindi
& Mr. Sandeep 
Barua 
Students of age 
group 11 to 15
All SIT’s
Monday  15.
6.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry 
group 11 to 15
All SIT’s
Tuesday 16.
7.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s
Wednesday 17.
8.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s
Thursday 18.
9.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s
Friday 19.
10.6.11
Students of age  Mr. Kapil Tripathi  English/ Hindi Fun with Chemistry  
group 11 to 15
All SIT’s

रेडियो जापान (एन. एच. के.) हिंदी कार्यक्रम

रेडियो जापान (एन. एच. के.) हिंदी कार्यक्रम का समय और फ्रिक्वंसी में परिवर्तन |



रेडियो के लिए फ्रीक्वेंसी और कार्यक्रम सूची

प्रसारण समय और फ्रीक्वेंसी

भारतीय समयजापानी समयप्रसारण क्षेत्रफ्रीक्वेंसी
20:00 - 20:4523:30 - 00:15दक्षिण एशिया15745 किलोहर्ट्ज़ 
(19 मीटर बैंड)
07:00 - 07:3010:00 - 10:30दक्षिण एशिया11740 किलोहर्ट्ज़ 
(25 मीटर बैंड)

कार्यक्रम सूची

सोमवारमंगलवारबुधवारबृहस्पतिवारशुक्रवारशनिवाररविवार
समाचार और सामयिक वार्ता (15 मिनट)
कार्यक्रम (30 मिनट)
सरल जापानीजापान दर्पण

विज्ञान और प्रौद्योगिकी
/ नए कारोबार
जापान दर्पण

समसामयिक / सामाजिक
/ साँस्कृतिक विषय
जापान दर्पण

समसामयिक / सामाजिक
/ साँस्कृतिक विषय
आओ पकाएँ जापानी खाना
या
अद्भुत जापान में आपका स्वागत है
(1)
आओ सीखें जापानी गीत
या
सुर बहार
( जापान का संगीत )
या
इन्द्रधनुष
( जापानी पॉप सँस्कृति ) (2)
चैरी के देश से
( श्रोताओँ के पत्रों के उत्तर )
आवाज़ों की दुनियाकहानियों का पिटारासवालों में जापान
सबरस

(1) आओ पकाएँ जापानी खाना, और अद्भुत जापान में आपका स्वागत है, हर सप्ताह बारी बारी से । वैबसाइट पर जानकारी उपलब्ध है ।
(2) प्रथम शनिवारः आओ सीखें जापानी गीत, अंतिम शनिवारः इन्द्रधनुष, शेष सप्ताह सुर बहार

Monday, 9 May 2011

९ वीं मई का दिन रशिया में विजय दिन, ग्योर्गी रिबन |

९ वीं मई का दिन रशिया में विजय दिन के रूप में मनाया जा रहा है |  दुशरे विश्व युध्ध में नाज़ी जर्मन सेना को हराकर सोवियत संघ ने विजय पायी थी | संत ग्योर्गी के नाम सें सम्बंधित लाल और नीले रंग की रिबन का बहोत बड़ा महत्व है | इस दिन रूस में लोग यह ग्योर्गी रिबन लगते हैं | 

પ.પૂ. મોરારી બાપૂ એ ભુજ માં સિધાર્થ પાર્ક માં ગ્રંથ મંદિર નું લોકાર્પણ કર્યું .


પ.પૂ. મોરારી બાપૂ એ ભુજ માં સિધાર્થ પાર્ક માં ગ્રંથ મંદિર નું લોકાર્પણ કર્યું . તેમને સૌ શ્રોતાઓને સ્થિતિ અને પરિસ્થિતિ માં સુધારો લાવવા સારા પુસ્તકો નું વાંચન કરવા શીખ આપી. આ પ્રસંગે તેમને ગાંધીજી અને કવિવર રવીન્દ્રનાથ ટાગોર નાં જીવન પ્રસંગો નું વર્ણન કર્યું. 

माँ एक अद्भुत अहेसास है |

माँ एक अद्भुत अहेसास है | आज ८ मई २०११ मधर दे  पुरे विश्व में मनाया जा रहा है | दुनियां की सभी माँओं को शत शत प्रणाम |

कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर की १५० विन जन्मजयन्ती आज ७ मई २०११ के दिन



कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर की १५० विन जन्मजयन्ती आज ७ मई २०११ के दिन पुरे विश्व में मनाई जा रही है | शांति निकेतन कोलकता में आज विशेषरूप सेन उनकी जीवन की यादगार घटनाओं पर आधारित फोटो प्रदर्शनी राखी गयी है और उनकी साहित्यिक रचनाओं को प्रस्तुत किया जा रहा है |
उनकी एक रचना बंगाली में कुछ इस तरह है  " भंगे मोर गोरेर चाबी नी जाबी के आमारे ...
ओ बोंधू आमार ना पे तोमार देखा एक एक दिन जो आमार काटे नारे ,...

Tuesday, 12 April 2011

रेडियो रूस , हिंदी सेवा

रेडियो रूस ,
हिंदी सेवा 
आदरणीय श्रीमान अनिल जनविजय जी , ल्युद्मिलाजी , कश्मिर्जी 
सबको बहोत बहोत नमस्कार ,
पिछले आपके पत्रों की समीक्षा में श्री अनिल जी ने बताया की मुझे पात्र में कोई संबोधन नहीं होता | सब ल्युदमिला जी को लिखते हैं | इस लिए मैंने पहले अनिल जी का नाम लिखा है | आज १२ अप्रैल है | मैं इस दिन का बहोत ही उत्सुकता सें इंतझार करता हूँ | आज के दिन विश्व के पहले अन्तरिक्ष यात्री उरी गागारिन ने अन्तरिक्ष में उड़ान भरी थी | आज रेडियो रूस की वेबसाइड पर इस विषय के बारे में बहोत ही ज्ञानवर्धक सामग्री आपने रखी है | गागारिन लाइव , युरी गागारिन की अंतिम उड़ान , कई फोटो , मैंने कई गन्तो तक यह देखा है , पढ़ा है | इतनी साडी सामग्री को रखने लिए रेडियो रूस को धन्यवाद देता हूँ | सभी श्रोताओं को देखने का अनुरोध भी करता हूँ |  सच में युरी गागारिन के अल्प कार्यकाल में दुनिया को कितना कुछ दिया | आने वाके हजारों सालों तक यह कारनामा एक अद्भुत एहसास देता रहेगा |
सोर्ट वेव पर प्रसारण अच्छा नहीं आता | पर कई कार्यक्रम की ऑडियो फ़ाइल सुनने को मिलती है | आवाज भी बहोत ही अच्छी होती है |
आपने मुझे भेजी सामग्री ओर फोटो मिल गए हैं | बहोत ही सुक्रिया |
आपका 
नानजी जनजानी 

दुनिया भर में यूरी गगारिन की उड़ान की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है


आज पूरी दुनिया में सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन की उड़ान की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। 12 अप्रैल सन् 1961 को बाइकानूर अंतरिक्ष अड्डे से अंतरिक्ष यान 'वस्तोक' ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी जिसमें यूरी गगारिन सवार थे। इस प्रकार सोवियत संघ का नागरिक दुनिया का पहला ऐसा व्यक्ति बना जिसने पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश किया। उन्होंने 108 मिनट में पृथ्वी की कक्षा का एक चक्कर पूरा किया। कुछ ही घंटों में सोवियत अंतरिक्ष यात्री का नाम सारी दुनिया में मशहूर हो गया था। इस ऐतिहासिक घटना ने भविष्य में मानव सहित अंतरिक्ष उड़ानें भरने तथा विशाल पैमाने पर अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए मार्ग प्रशस्त किया था।  
 संयुक्त राष्ट्र महासभा ने कुछ दिन पूर्व 12 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष उड़ान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था।
रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव आज अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से संपर्क स्थापित करेंगे। यूरी गगारिन की उड़ान की 50वीं वर्षगांठ के सम्मान में आज शाम को मास्को में तोपों से 50  बार सलामी दी जाएगी।

आपके पत्रों की समीक्षा

रेडियो रूस के श्रोताओं के पत्रों पर आधारित हमारा कार्यक्रम - "आपके पत्रों की समीक्षा"
http://hindi.ruvr.ru/2011/03/23/47861265.html

साइबर-अपराध

विज्ञान में अमेरिका को पीछे छोड़ते चीन, भारत


भारत, चीन, ब्राजील विज्ञान में अमेरिका जैसे सुपर पॉवर को पीछे छोड़ रहे हैं. चीन तो इस क्षेत्र में सुपर पॉवर बनने की ओर है. ब्रिटिश अकादमी ने कहा कि जापान, यूरोप, अमेरिका पीछे छूट रहे हैं.

 
ब्रिटेन की रॉयल साइंस अकादमी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञान में तेजी से प्रगति करते कुछ देश विज्ञान से गहरे जुड़े हुए नहीं हैं. इनमें ईरान, ट्यूनिशिया, तुर्की शामिल हैं. नॉलेज, नेटवर्क एंड नेशन्सः ग्लोबल साइंटिफिक कोलेबोरेशन इन 21. सेंचुरी नाम की इस रिपोर्ट में विज्ञान की कोशिशों और प्रभाव में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक मुश्किलों को दूर करने की क्षमता पर जोर दिया गया है. रिपोर्ट में इस तथ्य का खास ध्यान रखा गया है कि ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के खत्म होने पर दुनिया के सभी देश एक दूसरे को कैसे सहयोग दे रहे हैं. इस शोध की सलाहकार समिति के मुख्य क्रिस लेवलिन स्मिथ ने कहा, "विज्ञान जगत में बदलाव हो रहा है. यह बढ़ रहा है और इसमें नए खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं. चीन के ऊपर आने के अलावा दक्षिण पूर्वी एशिया,  मध्यपूर्व, उत्तर अफ्रीकी और दूसरे देश भी सामने आ रहे हैं."
लेवलिन स्मिथ के मुताबिक 2002 से 2007 में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए होने वाले खर्च करीब 45 फीसदी बढ़ गए. लेकिन विकासशील देशों में यह 100 प्रतिशत से बढ़ा है. उभरते देशों में चीन सबसे आगे है लेकिन दूसरे भी हैं. उन्होंने कहा कि शोध और सहयोग में बजट की बढ़ोतरी के साथ वैश्विक चुनौतियों को हल करने में मदद मिलनी चाहिए. 
आश्चर्यजनक तथ्य
इस रिपोर्ट के आंकड़े दिखाते हैं कि कैसे 1993 से 2003 के बीच और 2004 से 2008 के बीच प्रकाशित होने वाले शोध पत्रों में बदलाव आया है. हालांकि अमेरिका इस मामले में अब भी सबसे ऊपर चल रहा है लेकिन उसकी हिस्सेदारी 26 फीसदी से गिर कर 21 हो गई है. इसका सबसे कड़ा प्रतिस्पर्धी चीन है जिसकी हिस्सेदारी छह प्रतिशत से बढ़ कर 10.2 हो गया है.
ब्रिटेन तीसरे नंबर पर बना हुआ है हालांकि उसकी हिस्सेदारी हल्की सी कम हुई है. इनमें कुछ ऐसे भी देश हैं जो विज्ञान की दुनिया में कही नहीं थे और अचानक वह अहम हिस्सेदार बन गए हैं. इस मामले में ईरान सबसे तेजी से बढ़ता हुआ देश है और काफी मात्रा में विज्ञान के शोधपत्र प्रकाशित करता है. 1996 में वहां सिर्फ 736 शोध पत्र थे और 2008 में इनकी संख्या 13,238 हो गई.  
ईरान की सरकार भी विज्ञान के लिए वृहद योजना बना रही है. तुर्की की स्थिति भी मजबूत हुई है और वह धीरे धीरे चीन की प्रतियोगिता में आ रही है. 1996 से 2008 के बीच शोधकर्ताओं की संख्या 46 प्रतिशत से बढ़ गई है.
रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम
संपादनः ईशा भाटिया
 
 

Map of Yemen

Map of Yemen

Map of LIBIYA

Map of LIBIYA

Map of Egypt

Map of Egypt

12 अप्रैल को अंतरिक्ष दिवस


संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 12 अप्रैल को विश्व अंतरिक्ष दिवस मनाने की घोषणा की है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णय के अनुसार, अंतरिक्ष दिवस अब विश्व स्तर पर मनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने अपने 65वें अधिवेशन में रूस द्वारा इस सिलसिले में प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। 60 से ज़्यादा देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
12 अप्रैल 1961 को रूसी अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन ने दुनिया के इतिहास में पहली बार अंतरिक्ष यात्रा करके पृथ्वी का चक्कर लगाया था।

Thursday, 10 March 2011

९ मार्च विश्व के पहले अन्तरिक्ष यात्री युरी गगारिन के जन्मदिन पर सब को हार्दिक बधाई |

9 मार्च को यूरी गगारिन का जन्मदिन मनाया जाता है। दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन अगर जीवित होते तो आज 77 साल के हो गए होते। इस साल उनकी ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान की स्वर्ण जयंती भी मनाई जा रही है।




बहुत से लोग इस बात को जानते हैं कि यूरी गगारिन ने अपने अंतरिक्ष यान की उड़ान शुरू होते ही कहा था – “चलो भाई!” लेकिन इस के बाद क्या हुआ था, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। इसके बाद गगारिन ने सैन्य ढंग से नियमानुसार अंतरिक्ष उड़ान संचालन केंद्र को यह बताना शुरू कर दिया था कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं – मेरे ऊपर दबाव बढ़ रहा है...यान में कंपन हो रहा है... मेरी तबियत ठीक है। इसके बाद गगारिन की आवाज़ बदल जाती है – मैं भावुक होता जा रहा हूँ – एक खुशी, एक उमंग मेरे मन पर छा रही है। थोड़ी ही देर बाद अपने अंतरिक्ष यान के इंजनों की गूंज को दबाते हुए वे फिर से ज़ोरदार आवाज़ में कहने लगते हैं - “खिड़की में से मुझे पृथ्वी दिखाई दे रही है। बर्फ़, पेड़ और मैदानी इलाके।” आगे शायद उनकी समझ में यह नहीं आता कि और क्या बताया जाए तो वे पूछने लगते हैं - “और आप लोगों का क्या हाल है?” गौर करने की बात यह है कि यह उनकी उड़ान का सबसे ख़तरनाक प्रारमंभिक दौर था और गगारिन डरने की जगह उत्साह और उमंग से भरे हुए थे। उनके भीतर इतनी सकारात्मक ऊर्जा थी कि वह पृथ्वी पर उपस्थित अपने सहयोगियों से कह रहे थे कि मैं तो ठीक-ठाक हूँ। मेरी चिन्ता मत करो, तुम बताओ तुम कैसे हो। गगारिन के बारे में रूस में बहुत से गीत हैं। एक गीत के बोल हैं – जानते हैं, कैसा लड़का था वह? सचमुच गगारिन बड़े जीवन्त, हँसमुख और असली लड़के थे।



उनकी तस्वीरें भी आज हमें उनके बारे में बहुत कुछ बताती हैं। एक तस्वीर 1961 की गर्मियों में उनकी अंतरिक्ष उड़ान पूरी होने के बाद खींची गई थी, जिसमें गगारिन मास्को के फ़िल्म महात्सव में भाग लेने के लिए आए विदेशी मेहमानों को संबोधित कर रहे हैं। एक बेहद ख़ूबसूरत स्त्री अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से गगारिन की ओर देख रही है। उसकी आँखों में उल्लास और प्यार भरा है। यह उन दिनों की विश्व प्रसिद्ध इतालवी अभिनेत्री जीना लोल्ला ब्रीजीदा है। उस दिन इन दोनों की बहुत-सी तस्वीरें खींची गई थीं। विश्व का पहला अंतरिक्ष यात्री और विश्वप्रसिद्ध सुन्दरी – दोनों पास-पास खड़े हैं और मुस्करा रहे हैं। इस तस्वीर में ख़ास बात यह है कि जीना का सौन्दर्य यूरी गगारिन के प्रभाव को मद्धम नहीं कर रहा, बल्कि इसके विपरीत गगारिन की पौरूष छवि की वज़ह से जीना का सौन्दर्य कम होता दिख रहा है। यह गुण गगारिन का प्राकृतिक गुण था – उनसे एक प्रकाश-सा छलकता रहता था, जबकि वह एक साधारण रूसी किसान के घर में पैदा हुए युवक थे, जिसने द्वितीय विश्वयुद्ध की मार झेली थी, जो जर्मन सेना के कब्ज़े में बचपन गुज़ार चुका था। जीवन की कठिनाइयों और दुखों को उन्होंने ख़ूब झेला था। गगारिन हालाँकि पढ़ाई में बेहद अच्छे थे, लेकिन परिवार गरीब था और उन्हें माँ-बाप की सहायता करनी थी, इसलिए उन्होंने स्कूल की शिक्षा के साथ-साथ धातु-ढलाई का प्रशिक्षण प्राप्त करना शुरू कर दिया था। शाम को स्कूल जाया करते थे। स्कूल की पढ़ाई पूरी करके गगारिन ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश ले लिया और एयरोक्लब में जाने लगे। फिर वे सेना में विमानचालन का काम सीखने लगे। कुछ समय तक वे सेना में ही पायलट रहे और इसके बाद उन्हें संभवित अंतरिक्ष-यात्रियों के दस्ते में शामिल कर लिया गया और अंतरिक्ष यात्रा का प्रशिक्षण दिया जाने लगा।



जब हम उन लोगों की बातें सुनते हैं जो गगारिन को निजी रूप से जानते थे, जब हम गगारिन की आवाज़ सुनते हैं, उनकी तस्वीरें देखते हैं या गगारिन के बारे में विडियो-फ़िल्में देखते हैं तो हमारे सामने उनके और भी बहुत से गुण उभर कर सामने आ जाते हैं। उनका स्वाभिमान, उनकी ख़ूबसूरती, उनका साहस, उनके भीतर छिपी ऊर्जा, उनका आत्मसंयम, सहजता, लगातार सक्रिय बने रहना और शरीरिक रूप से स्वस्थ दिखाई देना – ये सब गुण उन्हें प्रकृति से मिले थे। ईश्वर ने उन्हें ऐसा ही बनाया था या फिर गगारिन ने ख़ुद को ऐसा बना लिया था। हम चाहे जो भी सोचें, लेकिन जो सोचेंगे, वही बात सच होगी।



उनकी तमाम तस्वीरों के बीच एक तस्वीर ऐसी भी है, जिस में गगारिन के चेहरे पर हँसी नहीं है। उनके चेहरे पर मुस्कान भी नहीं है। शायद यह तस्वीर उनकी अंतरिक्ष उड़ान समाप्त होने के तुरन्त बाद की है। गगारिन ने अपनी अंतरिक्ष पोशाक उतार दी है और उनके सूट के छाती के पास बटन खुले हुए हैं। गगारिन के चेहरे पर असीम शांति विराजमान है। एकदम पारदर्शी चेहरा। गाल कुछ-कुछ पिचके हुए, ऐसा लग रहा है जैसे वे बेहद थके हुए हों। नज़र में एक विरक्ति, एक विराग का भाव है, जैसे वे खुद अपने मन के भीतर ही डूबे हुए हों। हो सकता है कि वे अपने मन की आँखों से उन दृश्यों को बार-बार देख रहे होंगे जो उन्होंने विराट अंतरिक्ष में जाकर देखे थे। और यह भी हो सकता है कि पृथ्वी के पहले अंतरिक्ष यात्री अपने भविष्य में झाँक रहे होंगे और उन्हें यह दिखाई दे रहा होगा कि सिर्फ़ 7 साल बाद, सिर्फ़ 34 वर्ष की उम्र में एक रहस्यपूर्ण विमान-दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाएगी। इसका जवाब हमें कभी नहीं मिलेगा कि वे उस समय क्या सोच रहे थे।